मैंने नामचीन ऐक्टर नाना पाटेकर की तरह डायलॉग मारने की कभी नहीं सोची, फिर भी मेरे मुंह से जब-तब निकल ही जा रहा है- एक मच्छर आदमी को...। अब आप मुझ से यह अनुरोध मत कीजिएगा कि पूरा डायलॉग बोलो। अगर आपकी स्मृति में नाना पाटेकर का यह डायलॉग नहीं है, तो मेरे लिए यह बहुत अच्छा है। मैं किसी भी जेंडर के लिए कोई ऐसा शब्द नहीं बोलना चाहता कि वह अपमान का सबब बन जाए। लेकिन क्या करूं कि एक तो मैं नाना का जबर्दस्त फैन हूं और दूसरा, मच्छरों ने मेरा जीना हराम कर रखा है...।
मैं आज तक नहीं समझ पाया कि मुझ में ऐसी कौन सी खूबी है कि ढूंढ़-ढूंढ़ कर मच्छर मेरे पास ही आते हैं। चार दोस्त बैठे हों, लेकिन मच्छरों के पास मेरा ही एड्रेस होता है। पता नहीं क्यों वे मेरा ही चेहरा चूमने को आतुर रहते हैं। उन्हें मुझसे इतना ज्यादा प्यार है कि चेहरा चूमने का मौका न मिलने पर पांव चूमने लगते हैं। उनके सामने बड़े-बड़े डॉक्टर फेल, इतनी सफाई से सुई लगाते हैं। कई बार तो यह भी देखने में आया है कि घर भर में एक ही मच्छर होता है, लेकिन वह नाक में दम किए रखता है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि लुकाछुपी के खेल में मच्छर का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है। बाथरूम से लेकर बेडरूम तक, बाल्कनी से लेकर किचन तक हर जगह आपको 'मिन-मिन भिन-भिन' तो सुनाई देगी, परंतु मच्छर महाशय कहीं नजर नहीं आएंगे। एक पल दिखेंगे, दूसरे ही पल अदृश्य हो जाएंगे। परंतु इधर आपकी आंख झपकी नहीं कि उधर सुई लगी।
कुल मिलाकर यही कि एक मच्छर पूरे घर को हिलाने की सामर्थ्य रखता है। आपको गुस्से से भर सकता है। जैसे ही आप मच्छर को मसल कर उसे मोक्ष प्रदान करने की सोचेंगे, उसी पल वह आपको चकमा दे देगा और अंतर्ध्यान हो जाएगा। भागते रहिए अब आप उसके पीछे। सोचते रहिए दो हथेलियों के बीच फंसा कर उसे परलोक पहुंचा देने की। आपको इस काम में सफलता मिलना संदिग्ध है। अंत में जब आप थक-हार कर बैठ जाएंगे, तो आपके मुंह से नाना पाटेकर की तरह डायलॉग निकलना लाजिमी है- एक मच्छर आदमी को...।
