सिविल अस्पताल में लापरवाही की भेंट चढ़े चार FFP बैग्स

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गुड़गांव के सिविल अस्पताल में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। मरीजों की जान बचाने वाले चार प्लाज्मा बैग चार दिन तक पानी में पड़े रहने से खराब हो गए। यह घटना ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली और अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े करती है। जीवन रक्षक संसाधनों की इस बर्बादी से जरूरतमंद मरीजों को नुकसान हुआ है।

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चार दिन तक पानी में पड़े रहे मरीजों की जिंदगी बचाने वाले प्लाज्मा बैग, हुए खराब

प्लाज्मा बेकार होने से ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली व अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल

दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव

मिलेनियम सिटी के सेक्टर-10 स्थित सिविल अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए रखे जाने वाले फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) के खराब होने का गंभीर मामला सामने आया है। ब्लड बैंक में रखे चार FFP बैग्स खराब हालत में पाए गए हैं, जिससे ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह मामला सीधे तौर पर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की लापरवाही से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार, किसी जरूरतमंद मरीज के लिए FFP लेने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्लाज्मा को उपयोग के लिए सामान्य तापमान पर लाने के लिए पानी में रखा गया लेकिन मरीज वापस नहीं लौटा और स्टाफ भी प्जाज्मा बैग को पानी से निकालना भूल गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ये बैग करीब चार दिन तक पानी में ही पड़े रहे। बाद में ब्लड बैंक के ही एक कर्मचारी की नजर बकेट पर पड़ी, तब तक प्लाज्मा पूरी तरह खराब हो चुका था।

जीवन रक्षक संसाधन की बर्बादी

FFP का उपयोग एक्सिडेंट, डेंगू, लिवर रोग और ब्लीडिंग डिसऑर्डर जैसे गंभीर मामलों में किया जाता है। ऐसे में चार यूनिट प्लाज्मा का इस तरह खराब होना न केवल संसाधनों की बर्बादी है बल्कि उन मरीजों के साथ भी अन्याय है जिन्हें इससे लाभ मिल सकता था।

नियमों की की गई अनदेखी

नियमों के अनुसार, FFP को -30°C या उससे कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाना चाहिए और उपयोग से पहले नियंत्रित प्रक्रिया के तहत ही इसे तैयार किया जाता है। वहीं, यहां स्पष्ट रूप से निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिससे यह लापरवाही सामने आई।

कार्रवाई पर भी उठे सवाल

सूत्रों का दावा है कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद मामले को पूरी तरह दबा दिया गया। इससे न सिर्फ जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की आशंका बनी हुई है। गौरतलब है कि सिविल अस्पताल से न केवल अपने मरीजों के लिए बल्कि निजी अस्पतालों में भी ब्लड और ब्लड कंपोनेंट्स सप्लाई किए जाते हैं। ऐसे में यह लापरवाही सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरे की वजह बन सकती है। इस मामले में सीएमओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

क्या है FFP?

फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा खून का वह हिस्सा है, जिसमें क्लॉटिंग फैक्टर होते हैं और इसे गंभीर मरीजों के इलाज में उपयोग किया जाता है।