Bike Taxi Drivers Wish Dream Of Becoming A Journalist Left Behind In The Race For Reality
वह ‘काश’ के पीछे चल पड़ा
Contributed by: रवि ठाकुर|नवभारत टाइम्स•
एक पत्रकार की मुलाकात एक बाइक-टैक्सी ड्राइवर से हुई। ड्राइवर ने पत्रकार बनने की अपनी अधूरी ख्वाहिश बताई। उसने बताया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वह पढ़ाई छोड़ चुका है। पत्रकार ने उसे ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। ड्राइवर ने ऑफिस देखने की इच्छा जताई। पत्रकार ने उसे रिसेप्शन तक दिखाया।
एक सुबह, जब एक पत्रकार अपनी बाइक-टैक्सी से ऑफिस जा रहे थे, तो ड्राइवर ने उन्हें पहचान लिया। ड्राइवर ने बताया कि वह भी कभी पत्रकार बनना चाहता था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उसे यह सपना छोड़ना पड़ा। पत्रकार ने उसे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और ऑफिस के रिसेप्शन तक ले जाकर उसका हौसला बढ़ाया। इस मुलाकात ने ड्राइवर में उम्मीद जगा दी और पत्रकार को भी जीवन के अधूरे सपनों की याद दिला दी।
रोज की तरह उस दिन भी सुबह की शुरुआत भाग-दौड़ से हुई। समय की कमी के चलते मेट्रो की जगह बाइक-टैक्सी सर्विस लेने का फैसला किया। ऐप पर बाइक बुक की और कुछ ही देर में एक युवक कॉलोनी के गेट पर हाजिर था। उसके साथ सफर शुरू हुआ। रास्ते में सब कुछ सामान्य था, वही भीड़ और ट्रैफिक जैसा हर रोज होता है। जैसे ही ऑफिस के सामने बाइक रुकी, ड्राइवर मेरी तरफ मुड़ा और मुस्कुराते हुए बोला, ‘सर, आप यहां?’ उसके चेहरे पर हैरानी साफ दिख रही थी। मैंने सहजता से जवाब दिया, ‘हां, यही मेरा ऑफिस है। मैं मीडिया हाउस में काम करता हूं।’वह कुछ देर सोचता रहा, फिर उसने पूछा, ‘सर, आपके पास दो मिनट होंगे?’ मैंने घड़ी देखी, ऑफिस कार्ड स्वाइप करने में अभी 30 मिनट बाकी थे। मैंने कहा, ‘बिल्कुल, बोलिए।’ उसने बाइक साइड में खड़ी की और थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, ‘सर, मैं भी कभी पत्रकार बनना चाहता था। जब भी इस बिल्डिंग के सामने से गुजरता हूं, बस देखता रहता हूं। सोचता हूं काश! मैं भी किसी दिन यहां काम कर पाता। लेकिन हालात कुछ और ही कह गए।’
मैंने पूछा, ‘फिर किया क्यों नहीं?’ उसकी आंखों में एक थकी हुई, लेकिन उम्मीद भरी चमक थी। उसने बताया, ‘घर में मैं सबसे बड़ा हूं, पापा बीमार रहते हैं, चार छोटे भाई-बहन हैं। पढ़ाई छोड़ दी। अब बाइक सर्विस दे रहा हूं, ताकि घर चल सके।’ मैं थोड़ी देर चुप रहा। फिर मैंने कहा, ‘पर तुम अब भी पढ़ाई कर सकते हो। ऑनलाइन कोर्सेज हैं, ओपन यूनिवर्सिटीज हैं, टाइम निकालो, कोशिश करो।’
वह मुस्कुराया और बोला, ‘सर, बुरा ना मानिए तो एक बात कहूं... क्या आप बस एक बार अंदर से ऑफिस दिखा सकते हैं?’ मैं एक पल के लिए सोच में पड़ गया। अंदर जाने का सिस्टम काफी सख्त था, विजिटर्स कार्ड की जरूरत पड़ती थी। फिर मैंने कहा, ‘पूरा ऑफिस नहीं, लेकिन रिसेप्शन तक चल सकते हैं। बोलो, चला जाए?’ उसकी आंखों में बच्चे जैसी चमक आ गई, ‘प्लीज सर, यही बहुत हो जाएगा।’
अंदर दीवारों पर लगी अखबारों की कटिंग्स, तस्वीरें, सुर्खियों से भरे फ्रेम - वह हर चीज को ऐसे देख रहा था, जैसे किसी किताब के पन्ने पढ़ रहा हो। कुछ देर बाद उसने धन्यवाद कहा और बस इतना ही बोला, ‘काश...।’ और वह चुप हो गया। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, ‘कोशिश करना, क्या पता तुम्हारा ‘काश’ हकीकत बन जाए।’ उसकी आंखें एकदम से चमक उठीं। उसने कहा, ‘आपकी बातों ने मेरे उम्मीद के परों को हवा दे दी है। मैं यह करके रहूंगा।’
उस दिन अपनी सीट पर लौटा, तो उसकी आंखों की चमक मेरे जेहन में उतर रही थी। हम सबके जीवन में कहीं न कहीं कोई ‘काश’ दबा रह जाता है। फर्क इतना होता है कि कुछ लोग उसे वहीं दफन कर देते हैं, कुछ उसे जीने की हिम्मत बटोरकर चल पड़ते हैं। यह मुलाकात एक याद दिलाती है कि सपने कभी मरने नहीं चाहिए, बस उन्हें पूरा करने का रास्ता बदलना पड़ सकता है।
यह घटना बताती है कि कैसे एक छोटी सी मुलाकात भी किसी की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है। उस बाइक टैक्सी ड्राइवर की तरह, जिसके मन में पत्रकार बनने का सपना आज भी जिंदा था। उसने अपनी मजबूरी बताई, लेकिन पत्रकार के प्रोत्साहन ने उसे फिर से उम्मीद दी। यह सिर्फ एक ड्राइवर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की कहानी है जिनके सपने हालात के आगे दब जाते हैं।
पत्रकार ने उसे ऑनलाइन पढ़ाई और ओपन यूनिवर्सिटी जैसे विकल्प सुझाए। यह दिखाता है कि आज के समय में भी अपने सपनों को पूरा करने के रास्ते मौजूद हैं, बस थोड़ी कोशिश और सही दिशा की जरूरत है। रिसेप्शन तक ले जाकर पत्रकार ने उसे सिर्फ ऑफिस नहीं दिखाया, बल्कि एक उम्मीद की किरण दिखाई। दीवारों पर लगी उपलब्धियां उस ड्राइवर के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं।
उसकी आंखों में आई चमक और "मैं यह करके रहूंगा" कहना, इस बात का सबूत था कि प्रोत्साहन कितना मायने रखता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए और दूसरों को भी उनके सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जीवन में ऐसे कई मौके आते हैं जब हमें लगता है कि सब खत्म हो गया, लेकिन तभी कोई ऐसा मिल जाता है जो हमें फिर से खड़े होने की हिम्मत देता है।
यह घटना एक सीख देती है कि हर किसी के जीवन में कोई न कोई अधूरा सपना होता है। कुछ लोग उसे भूल जाते हैं, लेकिन कुछ लोग उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा देते हैं। उस ड्राइवर ने पत्रकार से कहा, "आपकी बातों ने मेरे उम्मीद के परों को हवा दे दी है।" यह वाक्य बताता है कि कैसे एक व्यक्ति की कही बात किसी दूसरे के लिए जीवन बदलने वाली साबित हो सकती है।
पत्रकार ने भी अपनी सीट पर लौटकर उस ड्राइवर की आंखों की चमक को याद किया। यह दिखाता है कि कैसे दूसरों की प्रेरणादायक कहानियां हमें भी सोचने पर मजबूर करती हैं। यह लेख हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमारे जीवन में भी ऐसे कौन से ‘काश’ हैं जिन्हें हमने दबा दिया है और क्या हम उन्हें हकीकत बनाने की हिम्मत जुटा सकते हैं। यह एक ऐसी कहानी है जो उम्मीद जगाती है और सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरित करती है।