वैज्ञानिकों ने की मल्टी टारगेटिंग दवा अणुओं की खोज

नवभारत टाइम्स

सोनभद्र इंजिनियरिंग कॉलेज के वैज्ञानिकों ने मल्टी टारगेटिंग दवा अणुओं की खोज की है। यह खोज भविष्य में कई बीमारियों के इलाज में क्रांति लाएगी। इन अणुओं से एक ही दवा बैक्टीरिया, फंगस के संक्रमण और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के निदान में कारगर होगी। कंप्यूटर परीक्षण के बाद प्रयोगशाला में इन अणुओं को तैयार किया गया।

discovery of multi targeting drug molecules revolutionizing treatment for bacteria fungus and cancer
वाराणसी: सोनभद्र इंजीनियरिंग कॉलेज के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मल्टी-टारगेटिंग दवा की खोज की है जो भविष्य में कई बीमारियों का इलाज कर सकेगी। यह दवा बैक्टीरिया और फंगस के संक्रमण के साथ-साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के निदान में भी कारगर साबित हो सकती है। इस शोध का नेतृत्व असिस्टेंट प्रो. डॉ. हरीश चंद्र उपाध्याय ने किया। उन्होंने बताया कि पौधों में पाए जाने वाले प्राकृतिक अणुओं को नैफ्थेक्विनोन फारमाकोफोर से जोड़कर नई हाइब्रिड दवाएं तैयार की गई हैं।

शुरुआत में, कंप्यूटर पर इन अणुओं का परीक्षण किया गया। इसके बाद, प्रयोगशाला में चुने हुए अणुओं को तैयार किया गया। फिर, बीएचयू के विज्ञान संस्थान और एमआईआईटी मेरठ के फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी विभाग की लैब में इन अणुओं की संक्रमण से लड़ने की क्षमता का परीक्षण किया गया। दोनों ही जगहों पर परीक्षणों से यह पुष्टि हुई कि इन मल्टी-टारगेटिंग अणुओं में कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता है।
इस महत्वपूर्ण शोध में बीएचयू के विज्ञान संस्थान के जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. बिप्ल कोच, शोध छात्रा पूजा गोस्वामी, लखनऊ के हाइजिया इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के डॉ. हरदेश कुमार मौर्य, आईअसीएआर के डॉ. मयंक और एमआईटी मेरठ के डॉ. आलोक शर्मा का भी अहम योगदान रहा।

डॉ. हरीश चंद्र उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने पौधों में पाए जाने वाले फाइटोमालीक्यूल को नैफ्थेक्विनोन फारमाकोफोर नामक प्राकृतिक अणुओं से जोड़ा। इससे ऐसे हाइब्रिड अणु बने जो एक साथ कई बीमारियों पर असर कर सकते हैं। यह एक बड़ी सफलता है क्योंकि इससे एक ही दवा से कई तरह के संक्रमणों और बीमारियों का इलाज संभव हो सकेगा।

कंप्यूटर पर शुरुआती परीक्षणों के बाद, प्रयोगशाला में इन अणुओं को बनाया गया। इसके बाद, उनकी संक्रमण रोधी क्षमता को जांचने के लिए इन विट्रो परीक्षण किए गए। इन विट्रो परीक्षण का मतलब है कि यह परीक्षण प्रयोगशाला में जीवित कोशिकाओं या ऊतकों पर किया गया, न कि किसी जीवित प्राणी के शरीर के अंदर।

बीएचयू और एमआईआईटी मेरठ की लैब में हुए परीक्षणों में इन मल्टी-टारगेटिंग अणुओं की बहुबीमारी रोधी क्षमता की पुष्टि हुई। इसका मतलब है कि ये अणु एक से अधिक बीमारियों के खिलाफ काम कर सकते हैं। यह खोज भविष्य में नई और प्रभावी दवाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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