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नवभारत टाइम्स

संसद का बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों पर बात करने के बजाय विरोध प्रदर्शन में उलझे हैं। अमेरिका के साथ डील पर भी सदन में चर्चा नहीं हो रही है। वहीं, पाकिस्तान क्रिकेट का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रहा है। उसने भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर दिया है।

parliamentary disruptions and politics in cricket readers mail concerns
संसद में हंगामे और क्रिकेट में राजनीति के मुद्दे पर दो पाठकों ने अपनी राय व्यक्त की है। किशन गंज के पैंथर तोमर ने बजट सत्र में हो रहे हंगामे पर चिंता जताई है, जहाँ सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और कटु शब्दों के इस्तेमाल से संसदीय मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं। उनका कहना है कि जनता अपने प्रतिनिधियों को मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए चुनती है, लेकिन वे हंगामे में उलझे हैं। अमेरिका के साथ हुई डील पर भी स्पष्टता की कमी है, जिस पर सदन में चर्चा नहीं हो रही है। तोमर का मानना है कि सरकार और विपक्ष को मिलकर इस गतिरोध को दूर करना चाहिए। वहीं, दिल्ली के संतोष रावत ने क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ खेलने से इनकार करने को खेल का राजनीतिकरण बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला पाकिस्तान का क्रिकेट बोर्ड नहीं, बल्कि सरकार ले रही है। जब बोर्ड का चेयरमैन मंत्री और संरक्षक प्रधानमंत्री हो, तो राजनीति होना स्वाभाविक है। पाकिस्तान क्रिकेट को भारत को चोट पहुंचाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है और बांग्लादेश को मोहरा बना रहा है। रावत का मानना है कि यह उसकी गलतफहमी है और ICC को इस मामले में कड़े कदम उठाने चाहिए, वरना विश्व क्रिकेट को नुकसान होगा।

पैंथर तोमर ने अपने संपादकीय में कहा है कि संसद का बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टिप्पणियां, हंगामा और कटु शब्दों का प्रयोग संसदीय नियमों और मर्यादाओं को झकझोर रहा है। जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए चुनकर सदन में भेजती है ताकि उनके मुद्दों को आवाज मिल सके। हर जनप्रतिनिधि को यह बात अच्छी तरह समझनी चाहिए, लेकिन वे हंगामे और विरोध-प्रदर्शन में उलझे हुए हैं। इस समय देश के सामने कई बड़े मुद्दे हैं। अमेरिका के साथ एक डील पर सहमति बनी है, लेकिन कुछ बातों को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता है। इस पर सदन में कोई बात ही नहीं हो रही है। जो सवाल सदन के बाहर पूछे जा रहे हैं, उन पर सदन के भीतर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? सरकार और विपक्ष, दोनों को मिलकर इस गतिरोध को दूर करना चाहिए।
संतोष रावत ने क्रिकेट में हो रही राजनीति पर अपनी चिंता व्यक्त की है। क्रिकेट विश्व कप का इंतजार इसलिए रहता है कि रोचक मुकाबले देखने को मिलेंगे, लेकिन इस बार गजब की राजनीति से सामना हो रहा है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर दिया है। यह अजीब बात है कि यह फैसला उनका क्रिकेट बोर्ड नहीं, बल्कि सरकार सुना रही है। यह सीधे-सीधे खेल का राजनीतिकरण है। वैसे, जब बोर्ड का चेयरमैन कोई मंत्री हो और संरक्षक देश का प्रधानमंत्री, तो राजनीति होगी ही। पाकिस्तान क्रिकेट के मंच का इस्तेमाल पॉलिटिक्स के लिए कर रहा है और उसने बांग्लादेश को मोहरा बनाया हुआ है। उसे लग रहा है कि क्रिकेट के जरिये वह भारत को चोट पहुंचा सकता है। हालांकि, यह उसकी गलतफहमी है। इस मामले में ICC को कड़े कदम उठाने चाहिए। अगर इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल ने अब सख्ती नहीं की, तो विश्व क्रिकेट को नुकसान पहुंचेगा।

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