n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव
जिले में राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में पटवार सर्कलों के पुनर्गठन की तैयारी शुरू हो गई है। अब पटवारियों का कार्यक्षेत्र केवल भूमि के रकबे के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित एरिया की आबादी और राजस्व कार्यों के बोझ को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य लोगों को राजस्व सेवाएं अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराना है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था में वर्ष 2025 की जनसंख्या संबंधी मानकों को आधार बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में आबादी अधिक है और भूमि रिकार्ड में नाम चढ़ाना,, इंतकाल, भूमि रिकॉर्ड संशोधन व अन्य राजस्व मामलों की संख्या ज्यादा है, वहां छोटे पटवार सर्कल बनाए जाएंगे। इससे एक पटवारी पर काम का दबाव कम होगा और लोगों के मामलों का निपटारा तेजी से किया जा सकेगा। वर्तमान में जिले में करीब 65 पटवारी विभिन्न क्षेत्रों में राजस्व कार्य देख रहे हैं। विभाग अब सर्कलों की नई रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिसमें कृषि भूमि के साथ-साथ संबंधित राजस्व एस्टेट की जनसंख्या को भी प्रमुख आधार माना जाएगा। इसके तहत करीब दो हजार एकड़ क्षेत्रफल को ध्यान में रखते हुए नए सर्कलों का निर्धारण किया जाएगा।
जिला राजस्व अधिकारी विजय कुमार यादव ने बताया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए दोनों के लिए अलग-अलग मानक अपनाए जाएंगे। तेजी से शहरीकरण वाले इलाकों में भूमि संबंधी लेनदेन और रिकॉर्ड अपडेट के मामलों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे क्षेत्रों में पटवारियों का कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा रखा जाएगा ताकि लोगों को समय पर सेवाएं मिल सकें। अधिकारियों का मानना है कि सर्कलों के पुनर्गठन से लंबित मामलों में कमी आएगी और राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी। साथ ही डिजिटल राजस्व प्रणाली को भी अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। विभाग का लक्ष्य है कि बदलती आबादी और जरूरतों के अनुरूप राजस्व प्रशासन को अधिक सक्षम और जवाबदेह बनाया जाए।
तेज़ी से हुए शहरीकरण ने बढ़ाई जरूरत : गुड़गांव जिले में पिछले एक दशक के दौरान शहरीकरण और आबादी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मानेसर, बादशाहपुर, सोहना और आसपास के क्षेत्रों में जमीन की खरीद बिक्री, नाम का ट्रांसफर, रजिस्ट्री और भूमि उपयोग परिवर्तन के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। इसके बावजूद कई स्थानों पर पटवार सर्कलों की सीमाएं वर्षों पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही बनी हुई हैं। ऐसे में एक पटवारी के पास रिकॉर्ड और मामलों का बोझ काफी बढ़ गया है। राजस्व विभाग का मानना है कि सर्कलों के पुनर्गठन से लोगों को समय पर सेवाएं मिलेंगी, रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर होगा और जमीन संबंधी विवादों के निपटारे की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बन सकेगी।

