ट्रैक पर रफ्तार, स्टेशन पर कारोबार

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गुड़गांव मेट्रो विस्तार परियोजना सिर्फ आवागमन का साधन नहीं रहेगी। इसके स्टेशन मिनी बिजनेस हब बनेंगे। 27 स्टेशनों पर दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां होंगी। इससे सालाना 804 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान है। वर्ल्ड बैंक की टीम ने भी इस मॉडल में रुचि दिखाई है। यह परियोजना गुड़गांव को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाएगी।

ट्रैक पर रफ्तार, स्टेशन पर कारोबार

न्यूमेरिक्स

804 करोड़ रुपये सालाना कमाई का है अनुमान

27 स्टेशन बनने हैं प्रॉजेक्ट के तहत

28.50 किमी होगी रूट की लंबाई

पॉइंटर्स

-प्रॉजेक्ट की DPR में तैयार किया कमाई का मॉडल

-वर्ल्ड बैंक की टीम ने भी मॉडल के बारे में ली जानकारी

-पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक होगा काम

-दूसरे चरण में सेक्टर-9 से DLF साइबर सिटी तक होगी कनेक्टिविटी

Yashlok.Singh

@timesofindia

गुड़गांव : शहर की रफ्तार बढ़ाने के लिए तैयार हो रही गुड़गांव मेट्रो विस्तार परियोजना को केवल एक यातायात सुविधा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने की भी तैयारी की जा रही है। इस प्रॉजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के तहत मेट्रो प्रॉजेक्ट के तहत बनने वाले स्टेशन केवल ट्रांजिट पॉइंट न होकर कमर्शल गतिविधियों का केंद्र भी रहेंगे। इन्हें मिनी बिजनेस हब के तौर पर डिवेलप किया जाएगा। बता दें पिछले दिनों वर्ल्ड बैंक की टीम ने गुड़गांव विजिट किया था। इस दौरान टीम गुड़गांव मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) ऑफिस पहुंची थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान टीम ने परियोजना के रेवेन्यू मॉडल के बारे में काफी दिलचस्पी दिखाई और इसके बारे में पूरी जानकारी GMRL अधिकारियों से ली। DPR में 2026 को आधार वर्ष मानते हुए करीब 804 करोड़ रुपये वार्षिक रेवेन्यू जेनेरेशन का अनुमान लगाया गया है। 2051 तक इसके साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इस आय में किराये के साथ-साथ नॉन फेयर रेवेन्यू को अहम आधार बनाया गया है। इनमें विज्ञापन, पार्किंग, रिटेल स्पेस और प्रॉपर्टी डिवेलपमेंट जैसे स्रोत शामिल हैं। हालांकि परियोजना अभी निर्माणाधीन है इसलिए ये आंकड़े अनुमानित हैं।

दुकानों के लिए अलग से रखी जाएगी जगह

जीएमआरएल के प्रवक्ता ने बताया मेट्रो प्रॉजेक्ट का रेवेन्यू मॉडल सबसे अहम हिस्सा होता है। परियोजना के अंतर्गत बनने वाले मेट्रो स्टेशन और डिपो की उपलब्ध जमीन और स्पेस का कमर्शयल उपयोग किया जाएगा। स्टेशन प्लानिंग में कंकोर्स एरिया में रिटेल शॉप्स, कियोस्क और अन्य सेवाओं के लिए स्थान रखा जाएगा। इसके अलावा प्रॉपर्टी डिवेलपमेंट को परियोजना की वित्तीय मजबूती का अहम हिस्सा माना गया है। ट्रैफिक इंटीग्रेशन के अंतर्गत स्टेशनों को बस, ऑटो और अन्य साधनों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है ताकि फुटफॉल को बढ़ावा मिल सके।

मेट्रो स्टेशन भविष्य में केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेंगे। अधिक फुटफॉल और कमर्शल गतिविधियों वाले क्षेत्रों में ये स्टेशन मिनी बिजनेस हब जैसी भूमिका निभाएंगे। परियोजना में कुल 27 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाने हैं उनका बेसिक ढांचा समान होगा। लेकिन उनकी क्षमता और सुविधाएं लोकेशन के अनुसार तय होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि DPR में दिए गए कमर्शल प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो गुड़गांव मेट्रो नेटवर्क ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा दे सकते हैं।

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