सरपंच पिता हुई मौत, उपचुनाव में तीन भाई आमने-सामने

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झज्जर जिले के बाढसा गांव में सरपंच पद के उपचुनाव में एक ही परिवार के चार सदस्य मैदान में हैं। पूर्व सरपंच ज्ञानचंद के निधन के बाद उनके तीनों बेटे और भाई चुनाव लड़ रहे हैं। यह मुकाबला गांव के विकास और परिवार की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। ग्रामीण इस दिलचस्प मुकाबले पर नजरें गड़ाए हुए हैं।

three brothers and uncle face to face in by election after sarpanch fathers death making the contest interesting

n विनीत नरूला, झज्जर

झज्जर जिले के बाढसा गांव में सरपंच पद के उपचुनाव ने इस बार खासा रोचक मोड़ ले लिया है। गांव में 10 मई को होने वाले इस उपचुनाव में एक ही परिवार के चार सदस्य आमने-सामने हैं, इससे मुकाबला दिलचस्प बन गया है। दरअसल, गांव के पूर्व सरपंच ज्ञानचंद के निधन के बाद यह उपचुनाव करवाया जा रहा है। उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए अब उनके तीनों बेटों ने चुनावी मैदान में उतरकर ताल ठोक दी है। वहीं, इस मुकाबले को और पेचीदा बनाते हुए ज्ञानचंद के सगे भाई बालकिशन ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। बालकिशन का कहना है कि जब उनके भाई का निधन हुआ था, तब परिवार ने सर्वसम्मति से उन्हें विरासत संभालने के लिए समर्थन दिया था, लेकिन अब भाई के तीन सगे बेटे ही चुनाव में उनके खिलाफ उतर आए हैं, जिससे परिवार में ही सीधा मुकाबला बन गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस चुनाव में भाई के तीन बेटे दीपक,मनोज उर्फ सोनू व राजेश ने नामांकन दाखिल किया है। बालकिशन के अनुसार यदि यह तीनों भाई आपस में सर्व सम्मति बना ले तो वह चुनावी मैदान से हट जाएगें। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह भी चुनाव हर हाल में लड़ेंगे। तीनों बेटे और चाचा, सभी उम्मीदवार ज्ञानचंद के नाम और उनकी छवि के सहारे ही ग्रामीणों से वोट मांग रहे हैं। दूसरी ओर कार्यवाहक सरपंच संदीप का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में गांव में विकास कार्य करवाए हैं और वे काम के आधार पर ही जनता से समर्थन मांग रहे हैं। एक ही परिवार के चार सदस्यों के मैदान में होने से उपचुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।

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