अमेरिका और ईरान फिर से एक समझौते की दहलीज पर खड़े हैं। दोनों का इतिहास देखते हुए जब तक समझौता हो नहीं जाता, तब तक कुछ भी कहना मुश्किल है। लेकिन, हाल में होर्मुज स्ट्रेट में जिस तरह तनाव बढ़ रहा था, उसे देखते हुए दोनों देशों का बातचीत की मेज पर इतने करीब आना भी बड़ी खबर है और इसका असर तुरंत ही तेल व शेयर बाजार पर दिख गया।
यूरेनियम पर बात । अमेरिका और ईरान के बीच 14 पॉइंट्स वाले एक पेज के समझौते पर बातचीत चल रही है। बड़ी बात है कि इस बार ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज को भी इसमें शामिल किया गया है, जिसे लेकर पहले गतिरोध था। प्रस्ताव में यूरेनियम एनरिचमेंट पर ईरान के अस्थायी रोक लगाने की बात है और बदले में अमेरिका उस पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देगा। होर्मुज से नाकेबंदी भी खत्म होगी।
सहमति बनाई जाए । इस समझौते में दोनों पक्षों के लिए कुछ न कुछ है। अगर किसी मुद्दे पर सहमति बनने में मुश्किल पेश आती है, तो उसे भविष्य पर छोड़ देना ही समझदारी होगी। कोई भी पक्ष इस संघर्ष को लंबा खींचने की स्थिति में नहीं है। और न ही इस तरह के संघर्षविराम का अब कोई मतलब रह गया था, जिसमें होर्मुज पर पहरा है और जहाजों को निशाना बनाया जा रहा। स्थायी शांति के लिए दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता जरूरी है।
चीन का इस्तेमाल । अमेरिका ने इस बार ज्यादा कूटनीतिक रास्ता अपनाया है और उसका असर दिख रहा है। डॉनल्ड ट्रंप का प्रॉजेक्ट फ्रीडम को रोकना अच्छा कदम है, क्योंकि ताकत के बल पर होर्मुज को व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना लगभग असंभव है। इसी तरह, ईरान पर वार्ता का दबाव बनाने के लिए चीन का इस्तेमाल भी समझदारी है। चीन भले इस पूरे परिदृश्य में अभी तक सामने न आया हो, लेकिन इस संघर्ष में उसका भी बहुत कुछ दांव पर लगा है।
मार्केट में उम्मीद । दोनों पक्ष पहले भी बहुत करीब आकर असफल हो चुके हैं, इसलिए इस बार ज्यादा सतर्कता और संयम की जरूरत होगी। अमेरिका और इस्राइल को उकसावे वाली कार्रवाई से बचना होगा, तो ईरान के सामने चुनौती है कि एक फैसले के पीछे सारे गुट एकजुट नजर आएं। अभी बातचीत की घोषणा भर हुई है और क्रूड ऑयल के दाम में दो हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट आ गई - 6.7% की। वहीं, भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स में 940.73 अंक और निफ्टी में 298.15 अंकों की तेजी रही। संकट से घिरे बाजार को उम्मीद मिली है, इस बार इसका न टूटना ही सबके हित में है।

