लोग इतने गंभीर हो गए, जैसे किसी का क़र्ज़ चुका रहे हों

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आजकल लोग गंभीर हो गए हैं। वे ऐसे हंसते हैं जैसे कोई कर्ज चुका रहे हों। हंसी भगवान की देन है। हंसना मनुष्य होने का सबूत है। जीवन में सुख आए तो हंसें, दुख आए तो उसे हंस कर उड़ा दें। जमाना बदल गया है। बाप बेटे से डरता है। बेटा बाप होता है और बाप बेचारा।

why have people become so serious why have they forgotten to laugh know the true wealth of life

इंसान को इंसान बने रहना है तो उसे हंसते रहना चाहिए। हंसी भगवान की देन है। चुटकुले हैं हंसने-हंसाने के लिए, लाफ्टर-शो आते हैं, कॉमेडियन होते हैं हंसने-हंसाने के लिए। मैं भी आपसे कहना चाहता हूं- आप भी हंसिए रोतों को हंसाने के लिए। हंसी और खुशी जीवन की असली संपदा है।

लोग इतने गंभीर हो गए हैं कि हंसते भी ऐसे हैं जैसे किसी का कर्ज चुका रहे हों। आज-कल लोग किराये की हंसी से काम चला रहे हैं। अगर लोगों के बीच का फासला कम करना है तो दिल खोलकर हंसिए। हंसना मनुष्य होने का सबूत है, क्योंकि पूरे अस्तित्व में सिर्फ मनुष्य ही हंस सकता है। जिंदगी में कभी कोई सुख आए, तो हंस लेना और कभी दुख आए तो उसे हंस कर उड़ा देना।जमाना कैसा बदला है। जब आप छोटे थे तो बाहर जाने के लिए मां से कहते थे, 'मां! पिताजी से पूछो कि मैं बाहर जाऊं?' और अब जमाना यह आ गया कि बाप बेटे से पूछते डरता है कि, 'बेटा, कहां जा रहे हो?' कल तक बाप-बाप होता था और बेटा-बेटा। आज कहने को तो ये बाप हैं और ये इनका बेटा। सच्चाई यह है कि बेटा बाप होता है और बाप 'बेचारा'। किस्मत का मारा।

(साभार : डायमंड बुक्स)

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