पीएम ने गोल्ड खरीद रोकने और पेट्रोल बचाने के लिए क्यों कहा?

नवभारतटाइम्स.कॉम

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। कच्चे तेल, सोना, खाद्य तेल और उर्वरक के आयात पर खर्च बढ़ गया है। इससे महंगाई बढ़ रही है और रुपये पर दबाव आ रहा है। पीएम ने खर्च में संयम बरतने, सोने की नई खरीद रोकने और पेट्रोल-डीजल का उपयोग घटाने की अपील की है।

pms appeal to stop gold purchase and save petrol know the serious economic reasons behind it

Akhilesh.Singh1@timesofindia.com

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने खर्च में संयम बरतने, सालभर तक सोने की नई खरीद नहीं करने और पेट्रोल-डीजल का उपयोग घटाने की अपील की है। उन्होंने केमिकल फर्टिलाइजर का कम इस्तेमाल करने को भी कहा है। राजनीतिक सवालों के बीच इस अपील के पीछे कुछ गंभीर आर्थिक कारण हैं।

पेट्रोल-डीजल और गोल्ड:

देश अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल और लगभग 60% LPG आयात करता है। युद्ध के चलते आयात महंगा हो गया है। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल 60 डॉलर/बैरल के करीब था, लेकिन मार्च में यह 120 डॉलर की ओर बढ़ गया। भारतीय तेल कंपनियों की कच्चे तेल की खरीद का औसत भाव पिछले साल अप्रैल में 67.7 डॉलर/बैरल से लेकर इस साल फरवरी में 69 डॉलर रहा, लेकिन मार्च में यह उछलकर 117 डॉलर हो गया। मई में औसत भाव 105 डॉलर के करीब है। पिछले साल अप्रैल से इस साल मार्च तक भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 137.4 बिलियन डॉलर रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में गोल्ड इंपोर्ट रेकॉर्ड 71.98 बिलियन डॉलर का रहा, जो सालभर पहले से 24% ज्यादा था।

खाद्य तेल और उर्वरक:

भारत खाद्य तेलों की जरूरत का करीब 60% हिस्सा आयात करता है। पिछले साल करीब 19 बिलियन डॉलर का आयात हुआ था। उर्वरक की खपत के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। करीब 7 करोड़ टन की सालाना खपत में से 30% से ज्यादा उर्वरक आयात करने की जरूरत होती है। वित्त वर्ष 2025-26 में फर्टिलाइजर इंपोर्ट बिल करीब 14.5 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। इस बीच, युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर उर्वरकों के दाम ढाई महीनों में दोगुने से ज्यादा बढ़ चुके हैं।

अपील क्यों अहम?

- कच्चा तेल, गोल्ड, खाद्य तेल और उर्वरक का देश के कुल आयात में करीब 31% हिस्सा है। इन चारो के आयात पर खर्च पिछले साल अप्रैल से इस साल मार्च तक 240.7 बिलियन डॉलर रहा।

- आयात के लिए डॉलर में भुगतान होता है। जितना ज्यादा आयात होगा, उतने ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी। जितने ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी, रुपया उतना कमजोर होगा। इससे आयातित चीजें महंगी होती जाती हैं। देश में महंगाई सिर उठाने लगती है। ज्यादा महंगाई लोगों की कमाई पर हाथ मारती है।

- जनवरी में 2.74% रही रिटेल इंफ्लशन फरवरी में 3.21% होने के बााद मार्च में 3.4% हो चुकी है। अप्रैल में इसके और बढ़ने का अनुमान है, जिसके आंकड़े मंगलवार को जारी होंगे।

- महंगाई बढ़ने से RBI को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। कर्ज महंगा होगा तो लोगों के लिए खर्च करना और मुश्किल होता जाएगा। चीजों की खपत घटेगी तो कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने की जरूरत नहीं रहेगी। काम घटेगा, तो रोजगार पर आंच आएगी। यह एक कुचक्र है।

- आयात बढ़ने का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखता है। विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी के अंत में रेकॉर्ड 728.5 बिलियन डॉलर पर था, लेकिन 1 मई को खत्म हफ्ते में घटकर 690.7 बिलियन डॉलर पर आ गया।

-किसी भी इमर्जेंसी की स्थिति में आयात से जुड़ी जरूरतें पूरी करने, रुपये को सपोर्ट देने और अर्थव्यवस्था पर निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए दमदार विदेशी मुद्रा भंडार जरूरी होता है।

रेकमेंडेड खबरें