वाइवा, एक्सपर्ट लेक्चर ऑनलाइन

नवभारतटाइम्स.कॉम

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय अब अपनी शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन करने जा रहा है। एक्सपर्ट लेक्चर से लेकर पीएचडी वाइवा तक सब कुछ ऑनलाइन होगा। इससे विश्वविद्यालय के समय और धन की बचत होगी। बाहरी विशेषज्ञों को यात्रा से राहत मिलेगी। सेमिनार और कॉन्फ्रेंस के लिए यात्रा ग्रांट बंद कर दी गई है।

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nNBT रिपोर्ट, लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) भी अब अपनी शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन करने जा रहा है। इसके तहत अब विवि में एक्सपर्ट लेक्चर से लेकर वाइवा तक विभागों को ऑनलाइन कराने को कहा गया है। यह आदेश उनके लिए जारी किया गया है, जिनमें बाहरी विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। इसके तहत पीएचडी में होने वाला वाइवा भी विवि की ओर से ऑनलाइन कराने को कहा गया है, जिससे वर्तमान में संसाधनों की बचत की जा सके।

विवि की ओर से जारी आदेश में कहा गया है जिन परीक्षाओं में बाहरी विशेषज्ञों या परीक्षकों को आमंत्रित किया जाता है, उन्हें अब प्राथमिकता के आधार पर केवल ऑनलाइन मोड में ही संचालित किया जाएगा। पीएचडी वाइवा और अन्य शैक्षणिक संवादों के ऑनलाइन होने से जहां एक तरफ विश्वविद्यालय के समय और वित्तीय संसाधनों की बचत होगी, वहीं दूसरी ओर बाहरी एक्सपट् र्स को भी लंबी यात्राओं से राहत मिलेगी। विवि प्रशासन ने ऐसे बड़े आयोजन भी टालने को कहा है, जिसमें बाहरी संस्थानों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। अपरिहार्य परिस्थितियों में होने वाले कार्यक्रमों में भी बाहरी प्रतिभागियों की संख्या को न्यूनतम स्तर पर रखने को कहा गया है।

सेमिनार कॉन्फ्रेंस की ग्रांट भी बंद :वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए विवि ने कहा है कि अब सेमिनार या वर्कशॉप व कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए यात्राओं की ग्रांट भी अब विवि की ओर से नहीं दी जाएगी। ऐसे शैक्षणिक निजी स्वामित्व वाले वाहनों या विदेशी यात्राओं के लिए विश्वविद्यालय की ओर से कोई वित्तीय सहायता या स्पॉन्सरशिप नहीं दी जाएगी।

मेस के खाने में भी तेल होगा कम : विवि की ओर से जारी अडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि विवि के गेस्ट हाउस, कैंटीन और हॉस्टल की मेस को खाने की गुणवत्ता से समझौता किए बिना खाद्य तेल का सीमित किया जाए। खाने वाले तेल का विवेकपूर्ण उपयोग करने को कहा गया है। छात्रों और स्टाफ को मोटापा व मधुमेह जैसी बीमारियों से बचाने के लिए कम तेल वाले व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाएगी।