n NBT रिपोर्ट, लखनऊ
बिना हाजिरी के ही सीसीई एजुकेटर्स का मानदेय दिया जा रहा है। इस बारे में खुद महानिदेशक स्कूल शिक्षा के कार्यालय ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) सवाल पूछा है। वजह यह कि विभाग के बड़े अफसरों की मॉनिटरिंग में हाजिरी को लेकर बड़ा झोल सामने अया है। प्रदेश में 38 जिले तो ऐसे हैं जहां पोर्टल पर एजुकेटर्स की प्रोफाइल ही नहीं बनी। इसके अलावा भी ज्यादातर जिलों में जितने एजुकेटर रजिस्टर्ड हैं, उसके मुकाबले 10% से भी कम की हाजिरी दर्ज हो रही है।
प्रदेश में इस समय करीब 77,000 प्राइमरी और कंपोजिट स्कूल ऐसे हैं, जिनके परिसर में बाल वाटिकाएं चल रही हैं। इनमें बच्चों की देखभाल और प्री प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने के लिए सीसीई एजुकेटर भर्ती किए गए हैं। यह भर्ती आउटसाेर्सिंग के जरिए की गई है। इनको 11 माह की संविदा पर 10,313 रुपये के मानदेय पर रखा गया है। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना और उसी पर हाजिरी दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
मॉनिटरिंग में हुआ खुलासा : हाल ही में अधिकारियों ने इनकी हाजिरी की हाल ही में मॉनिटरिंग की गई तो इसमें बड़ा झोल सामने आया है। कुल 75 में से 38 जिले ऐसे हैं जहां पोर्टल पर इनकी प्रोफाइल ही नहीं बनी है और हाजिरी भी शून्य है। बाकी जिलों में भी जितने एजुकेटर रजिस्टर्ड हैं, उनकी भी अलग-अलग जिलों में 5% से 40% की ही हाजिरी पोर्टल पर दर्ज हो रही है।


