n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की आंखों की रोशनी कमजोर हो रही है। पिछले तीन साल के दौरान लगाए गए नेत्र जांच शिविरों में हर छठें बच्चे में आंखों से जुड़ी समस्या सामने आई है। एम्पथी फाउंडेशन और निरामया चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से स्कूलों में आयोजित कैंपों में 51 हजार से अधिक बच्चों की जांच की गई। जिनमें 7 हजार 319 बच्चों में रिफ्रैक्टिव एरर यानी नजर कमजोर होने की शिकायत मिली। विशेषज्ञ इसे कोविड के बाद बढ़े स्क्रीन टाइम, आउटडोर गतिविधियों में कमी, पोषण की कमी से जोड़ रहे हैं।
संस्था की ओर से साल 2023-24 से 2025-26 तक सरकारी स्कूलों में 210 नेत्र जांच शिविर लगाए गए। इनमें 51 हजार 17 बच्चों की आंखों की जांच की गई। साल 2023-24 में 17 हजार 410 बच्चों की जांच में 2 हजार 645 बच्चों में नजर की समस्या पाई गई। साल 2024-25 में 16 हजार 400 बच्चों की जांच में 2 हजार 302 बच्चे प्रभावित मिले, जबकि 2025-26 में अब तक 17 हजार 207 बच्चों की जांच में 2 हजार 372 बच्चों की आंखें कमजोर पाई गईं। यानी लगातार हर साल करीब 15 फीसदी बच्चे आंखों की समस्या से जूझते मिले। निरामया ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. टीएन आहूजा ने बताया कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे मिल रहे हैं, जिनकी आंखों की कभी जांच ही नहीं हुई। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. हितेंद्र आहूजा ने बताया कि लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों में मायोपिया यानी दूर की नजर कमजोर होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों की हर 6 महीने में आंखों की जांच कराई जाए और ब रोजाना कम से कम एक से डेढ़ घंटे आउटडोर गतिविधियों में शामिल किया जाए।


