नई दिल्ली : भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच निर्यात बढ़ाने के लिए भारत ने व्यापार समझौतों पर बहुत तेजी से कदम बढ़ाए हैं, लेकिन इनमें से कुछ पर जहां पश्चिम एशिया युद्ध का साया पड़ता दिख रहा है, वहीं ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के साथ समझौतों की राह में इनका रवैया आड़े आ रहा है।
पिछले साल 24 जुलाई को ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर दस्तखत हुए थे और यह करार इस साल मई में लागू होने वाला था, लेकिन ब्रिटेन की पैंतरेबाजी रोड़ा बनती दिख रही है। इस साल पहली जुलाई से वह ऐसे स्टील के टैरिफ फ्री इंपोर्ट का कोटा घटा देगा, जिसे उसके यहां बनाया जा सकता हो। कोटे से ऊपर के इंपोर्ट पर 50% टैरिफ लगेगा। भारत ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन में यह मसला उठाया है। वहीं, ब्रिटेन ने कहा है कि वह भारत सहित सभी प्रभावित देशों से बात करेगा। थिंक टैंक GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, 'टैरिफ फ्री स्टील इंपोर्ट कोटा 60% तक घटाने का ब्रिटेन का निर्णय इंडिया-UK FTA की राह में रोड़ा बन सकता है। ब्रिटेन भी स्टील व्यापार की यूरोपियन यूनियन की रणनीति पर जाता दिख रहा है।'
यूरोपियन यूनियन से इस साल जनवरी में हुए FTA में EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिजम का मुद्दा अहम है। भारत ने CBAM मामले में मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा हासिल कर लिया है। हालांकि श्रीवास्तव के मुताबिक, 'कोटा लिमिट के तहत स्टील शिपमेंट पर जीरो ड्यूटी हो सकती है, लेकिन हर 100 डॉलर के एक्सपोर्ट पर करीब 38% डॉलर की CBAM से जुड़ी कॉस्ट लग सकती है। कोटे से ऊपर के निर्यात पर EU 50% ड्यूटी लगा सकता है।' वहीं, यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसी हफ्ते गोटेनबर्ग में पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में इस साल के अंत तक ट्रेड डील लागू करने की बात कही, लेकिन उन्होंने इनवेस्टमेंट एग्रीमेंट का मुद्दा भी दोहरा दिया, जिस पर अभी बात नहीं बनी है।
वहीं, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के 6 देशों से एक ग्रुप के रूप में FTA पर बातचीत की शर्तें इस साल फरवरी में तय की गईं, लेकिन उसके बाद ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू हो गया। कॉमर्स मिनिस्टर गोयल ने उम्मीद जताई है कि 1 जून को ओमान के साथ FTA लागू हो जाएगा। हालांकि युद्ध की चुनौतियों के चलते GCC से बातचीत प्रभावित हुई है।


