‘देश में ट्राॅमेटिक ब्रेन इंजरी बड़ी समस्या’

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भारत में ट्राॅमेटिक ब्रेन इंजरी एक गंभीर समस्या है। केजीएमयू में उन्नत एमआरआई और एआई तकनीक से इसका पता लगाने पर शोध हो रहा है। कई बार सामान्य एमआरआई में चोट का पता नहीं चलता, लेकिन बाद में मरीजों को दिमागी दिक्कतें होती हैं। केजीएमयू में विशेष एमआरआई तकनीकों से ऐसी सूक्ष्म चोटों की पहचान की जा रही है।

traumatic brain injury a major health problem in india advanced research underway at kgmu

n NBT न्यूज, लखनऊ: उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में दुर्घटना, न्यूरोसर्जरी और तंत्रिका संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। इसी मरीज भार को शोध के अवसर में बदलते हुए केजीएमयू में उन्नत एमआरआई , डिफ्यूजन इमेजिंग और एआई आधारित मेडिकल इमेजिंग पर काम किया जा रहा है। ये बातें केजीएमयू के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के फैकल्टी सदस्य डॉक्टर दुर्गेश कुमार द्विवेदी ने दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित इंटरनैशनल सोसायटी फॉर मैग्नेटिक रेजोनेंस इन मेडिसिन (ISMRM) 2026 की वार्षिक बैठक में कहीं। उन्होंने बताया कि भारत में ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी एक बड़ी जनस्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। कई मरीजों की सामान्य एमआरआई रिपोर्ट ठीक दिखाई देती है, लेकिन बाद में उन्हें याददाश्त, सोचने-समझने और तंत्रिका संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। केजीएमयू में उन्नत डिफ्यूजन एमआरआई, एनओडीडीआई, रेस्टिंग-स्टेट एफएमआरआई और एमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी की मदद से ऐसी सूक्ष्म मस्तिष्क चोटों की पहचान पर शोध किया जा रहा है।