एनएसई ने कश्मीरी लाल राणा के खिलाफ दर्ज कराई पुलिस शिकायत, गलती से जमा हुए शेयरों की बिक्री का आरोप

NewsPoint

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने एक व्यक्ति के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत डीमैट खाते में गलती से जमा हुए एनएसई के शेयरों को कथित तौर पर अपने पास रखने और बेचने से संबंधित है। एक्सचेंज ने नुवामा वेल्थ फाइनेंस के साथ मिलकर दिल्ली हाईकोर्ट में दीवानी मुकदमा भी दायर किया है।

Navbharat Times
मुंबई, 19 जून (आईएएनएस)। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने आईपीओ के लिए दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। एक्सचेंज ने कश्मीरी लाल राणा नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि राणा ने गलती से उसके डीमैट खाते में आए एनएसई के 5,000 शेयर अपने पास रख लिए और उनमें से 3,685 शेयर करीब 1.33 करोड़ रुपये में बेच दिए। यह मामला आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से जुड़ा है। एनएसई और नुवामा वेल्थ फाइनेंस लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक दीवानी मुकदमा भी दायर किया है, जिसमें बेचे गए शेयरों की रकम और बचे हुए शेयरों की वापसी की मांग की गई है।

डीआरएचपी के अनुसार, यह घटना दिसंबर 2023 में हुई थी। एनएसई के 5,000 इक्विटी शेयर गलती से राणा के डीमैट खाते में आ गए थे। एक्सचेंज का कहना है कि राणा को पता था कि ये शेयर उसके नहीं हैं, फिर भी उसने उन्हें अपने पास रखा। जब तक इस गलती का पता चला, तब तक 3,685 शेयर बेचे जा चुके थे। एनएसई और नुवामा वेल्थ फाइनेंस लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट में मई 2025 में एक दीवानी मुकदमा दायर किया। उन्होंने अदालत से इन शेयरों की बिक्री से प्राप्त लगभग 1.44 करोड़ रुपये की वसूली की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने बचे हुए 1,315 शेयरों और उन पर मिले 5,260 बोनस शेयरों को भी वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। एनएसई ने सेबी के पास दाखिल ड्राफ्ट दस्तावेजों में बताया है कि जुलाई 2025 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई गई थी। यह एफआईआर एनएसई के अधिकृत प्रतिनिधि ने दर्ज कराई थी। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की उन धाराओं का उल्लेख है जो आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित हैं।

डीआरएचपी में दी गई जानकारी के मुताबिक, एनएसई ने यह खुलासा अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए किया है। आईपीओ के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दाखिल किया जाता है। यह एक तरह का कानूनी दस्तावेज होता है जिसमें कंपनी अपने व्यवसाय, वित्तीय स्थिति और आईपीओ से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करती है।

मई 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत, मामले के अंतिम निपटारे तक बचे हुए शेयरों और बोनस शेयरों की बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई थी। इसका मतलब है कि जब तक अदालत कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाती, तब तक इन शेयरों को बेचा या किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

एनएसई का यह कदम आईपीओ लाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। आईपीओ लाने से पहले कंपनियों को अपनी सभी देनदारियों और कानूनी मामलों का खुलासा करना होता है। यह निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति और संभावित जोखिमों के बारे में सूचित करने के लिए किया जाता है। इस मामले में, एनएसई ने यह सुनिश्चित किया है कि यह कानूनी मामला आईपीओ के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में स्पष्ट रूप से बताया जाए।

यह घटना शेयर बाजार में होने वाली गलतियों और धोखाधड़ी के जोखिमों को भी उजागर करती है। डीमैट खातों में शेयरों का गलती से जमा हो जाना और फिर उनका बेचा जाना एक गंभीर मामला है। एनएसई जैसी बड़ी संस्था के साथ ऐसी घटना होना चिंता का विषय है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे छोटी सी गलती भी बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती है और कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता पड़ सकती है।

रेकमेंडेड खबरें