रीवा में ईडी की बड़ी कार्रवाई: ठेकेदार कृष्णकांत सोहगौरा के घर पहुंची टीम, दस्तावेजों की जांच जारी
रीवा में ईडी की बड़ी कार्रवाई: ठेकेदार कृष्णकांत सोहगौरा के घर पहुंची टीम, दस्तावेजों की जांच जारी
NewsPoint•
रीवा शहर में ईडी की टीम ने पदमधर कॉलोनी में कृष्णकांत सोहगौरा और सौरभ सोहगौरा के घर पर छापा मारा। टीम दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। कृष्णकांत सोहगौरा रीवा के चर्चित ठेकेदारों में से एक हैं। भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
रीवा शहर में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने वार्ड क्रमांक 5 स्थित पदमधर कॉलोनी में कृष्णकांत सोहगौरा और सौरभ सोहगौरा के घर पहुंचकर जांच शुरू की। ईडी की 4 से 5 सदस्यीय टीम इन दोनों के निवास पर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, कृष्णकांत सोहगौरा रीवा के जाने-माने ठेकेदारों में से एक हैं और उन्हें भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा का भाई बताया जा रहा है। ईडी की इस कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, ईडी की ओर से अभी तक इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। टीम घर के अंदर दस्तावेजों की जांच और जरूरी जानकारी इकट्ठा करने में जुटी हुई है। समाचार लिखे जाने तक यह कार्रवाई जारी थी और ईडी की जांच के संबंध में आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई के कारणों का खुलासा हो सकेगा।
इस बीच, भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईडी को कुछ भी मिलने वाला नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ईडी छोटे-मोटे लोगों के यहां छापा मारेगी तो क्या मिलेगा? प्रदीप सोहगौरा ने यह भी कहा कि ईडी देश में बदनाम हो चुकी है और उनके सजा दिलाने का औसत 2 फीसदी से भी कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारी रिश्वत लेकर चुप हो जाते हैं और चालान तक पेश नहीं कर पाते हैं।यह घटना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा हाल ही में की गई एक बड़ी कार्रवाई के बाद सामने आई है। इससे पहले, ईडी की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने मंगलवार को महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में करनाल, दिल्ली और गोवा में अशोक मित्तल, सौरभ ढींगरा, भरत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और अन्य से जुड़े 11 ठिकानों पर ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम’ (पीएमएलए), 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया था। ईडी ने यह जांच सीबीआई द्वारा महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, इसके डायरेक्टरों और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और ‘प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट’ के तहत दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) के आधार पर शुरू की थी।
यह मामला ‘फिनाकल’ में संबंधित एंट्री किए बिना अनधिकृत स्विफ्ट संशोधनों के जरिए ‘फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिट’ (एफएलसी) की वैल्यू को धोखाधड़ी से बढ़ाने से जुड़ा है। इस धोखाधड़ी के कारण ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और कंसोर्टियम बैंकों को लगभग 155.21 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ था। एफएलसी एक तरह की गारंटी होती है जो बैंक जारी करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि खरीदार को माल मिलने पर भुगतान मिल जाएगा। इस मामले में, एफएलसी की कीमत को गलत तरीके से बढ़ाया गया था, जिससे बैंकों को नुकसान हुआ।
ईडी, जिसका पूरा नाम प्रवर्तन निदेशालय है, भारत सरकार की एक कानून प्रवर्तन एजेंसी है जो आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों की जांच करती है। मनी लॉन्ड्रिंग का मतलब है अवैध तरीके से कमाए गए पैसों को वैध बनाने की कोशिश करना। पीएमएलए, 2002 एक ऐसा कानून है जो मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और उससे जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने के लिए बनाया गया है।
रीवा में ईडी की कार्रवाई से स्थानीय लोगों में उत्सुकता और चिंता का माहौल है। यह देखना बाकी है कि ईडी की जांच में क्या सामने आता है और इसके क्या परिणाम होते हैं। इस तरह की जांचें अक्सर बड़े आर्थिक घोटालों से जुड़ी होती हैं और इनका खुलासा होने पर कई बार बड़े खुलासे होते हैं।