भारत के बिमल पटेल इंटरनेशनल लॉ ऑफ सी ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश निर्वाचित, समुद्री कानून में भारत की निरंतरता

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भारत के बिमल पटेल को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण का न्यायाधीश चुना गया है। वे सितंबर में अपना कार्यभार संभालेंगे। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिमल पटेल एक जाने-माने अंतरराष्ट्रीय विधिवेत्ता हैं। उनके चयन से समुद्री कानून के क्षेत्र में भारत की भूमिका मजबूत होगी। यह चुनाव बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

Navbharat Times
संयुक्त राष्ट्र में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत के बिमल पटेल को इंटरनेशनल लॉ ऑफ सी ट्रिब्यूनल (अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण) का न्यायाधीश चुना गया है। यह चुनाव गुरुवार को हुआ, और पटेल सितंबर में अपना पदभार संभालेंगे। इस चुनाव से भारत की समुद्री कानून के क्षेत्र में प्रतिनिधित्व की निरंतरता बनी रहेगी, क्योंकि वर्तमान उपाध्यक्ष नीरू चड्ढा का कार्यकाल भी सितंबर में समाप्त हो रहा है। बिमल पटेल एक जाने-माने अंतरराष्ट्रीय विधिवेत्ता हैं। वे फिलहाल यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य हैं और गुजरात के राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) भी हैं। इसके अलावा, वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून में पीएचडी की है, जो उन्होंने नीदरलैंड की लेडन यूनिवर्सिटी और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पूरी की है।

भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर इस खबर को साझा करते हुए कहा कि बिमल पटेल का चुनाव "बहुपक्षवाद और समुद्री कानून के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है।" भारतीय राजनयिकों ने पिछले एक साल से उनके चुनाव के लिए जोरदार अभियान चलाया था। इस बार, ट्रिब्यूनल की सात सीटों में से दो एशियाई क्षेत्र के लिए थीं। इनमें से एक सीट बिमल पटेल को मिली, और दूसरी वियतनाम की नैग्यून लन अन को। थाईलैंड के उम्मीदवार क्रियांग्सक किटिचासरी, जो मौजूदा न्यायाधीश थे और जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा था, चुनाव हार गए। वहीं, इंडोनेशिया ने मतदान से पहले ही अपना उम्मीदवार वापस ले लिया था। बिमल पटेल को कुल 168 वैध मतों में से 115 मत मिले, जो उनकी जीत को और भी मजबूत बनाते हैं।
यह महत्वपूर्ण चुनाव समुद्री कानून सम्मेलन के 36वें सत्र के दौरान हुआ। इस सत्र में 172 सदस्य देशों ने भाग लिया। जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित यह न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) समुद्रों और महासागरों से जुड़े विवादों को सुलझाने का काम करता है। यह समुद्री कानून की व्याख्या भी करता है, जिससे देशों के बीच समुद्री अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता बनी रहती है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बिमल पटेल को बधाई दी और यूएनसीएलओएस (United Nations Convention on the Law of the Sea) सदस्य देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "बिमल पटेल को इंटरनेशनल लॉ ऑफ सी ट्रिब्यूनल का न्यायाधीश चुने जाने पर हार्दिक बधाई। यूएनसीएलओएस सदस्य देशों को धन्यवाद।"

बिमल पटेल का न्यायाधीश चुना जाना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी और समुद्री कानून के क्षेत्र में उसकी विशेषज्ञता को मान्यता मिली है। नीरू चड्ढा का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी भारत का प्रतिनिधित्व बना रहेगा, जो समुद्री कानून से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में भारत की आवाज को मजबूत करेगा। बिमल पटेल का अनुभव और ज्ञान इस न्यायाधिकरण के कामकाज में महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह चुनाव भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में उसके बढ़ते प्रभाव का भी प्रतीक है।

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