जम्मू कश्मीर में 'सेहत' योजना फिर शुरू: प्राइवेट अस्पतालों को 175 करोड़ का पैकेज, बकाया बिलों का होगा भुगतान
जम्मू-कश्मीर में 'सेहत' योजना फिर शुरू: प्राइवेट अस्पतालों को 175 करोड़ का पैकेज, बकाया बिलों का होगा भुगतान
NewsPoint•
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 'सेहत' योजना को बचाने के लिए 175 करोड़ रुपये का पैकेज जारी किया है। प्राइवेट अस्पतालों को बकाया भुगतान का भरोसा दिया गया है। इससे पहले अस्पतालों ने योजना से हटने की घोषणा की थी। यह कदम लाखों लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रखने में मदद करेगा।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 'आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत' योजना से प्राइवेट अस्पतालों के हटने की चेतावनी के बाद, शुक्रवार को इस योजना को जारी रखने के लिए 175 करोड़ रुपये का पैकेज जारी किया है। सरकार ने अस्पतालों के बकाया बिलों का जल्द भुगतान करने का भरोसा भी दिलाया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है जहाँ आय की सीमा की परवाह किए बिना हर परिवार इस योजना का लाभ उठा सकता है। इस वित्तीय सहायता के बाद, प्राइवेट अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों ने योजना से बाहर निकलने के अपने फैसले को फिलहाल टाल दिया है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 'सेहत' योजना के तहत पैनल में शामिल प्राइवेट हेल्थकेयर संस्थानों के लंबे समय से लंबित रीइम्बर्समेंट क्लेम (खर्च की भरपाई के दावे) के निपटारे के लिए 175 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) के माध्यम से जारी की जाएगी, जिसके बाद रीइम्बर्समेंट की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि फंड के ट्रांसफर और वितरण में कुछ दिन लग सकते हैं। यह कदम 'सेहत' स्कीम के भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच उठाया गया है।इससे पहले, जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन ने क्लेम के निपटारे में हो रही देरी के कारण भारी वित्तीय संकट का हवाला देते हुए एक जुलाई से इस प्रोग्राम से हटने की योजना की घोषणा की थी। एसोसिएशन के अनुसार, बकाया राशि 250 करोड़ रुपये से अधिक हो गई थी, जिसके कारण उन्होंने यह चेतावनी दी थी।
स्टेट हेल्थ एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के दौरान, प्राइवेट हेल्थकेयर संस्थानों के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया गया कि मंजूर की गई राशि बिना किसी देरी के जारी कर दी जाएगी। इस आश्वासन के बाद, एसोसिएशन अपने प्रस्तावित डी-एम्पैनलमेंट (पैनल से हटने) को टालने और फिलहाल स्कीम के तहत हेल्थकेयर सेवाएं जारी रखने पर सहमत हो गई।
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाली हेल्थकेयर सेवाएं जारी रखने के लिए बकाया राशि का तुरंत भुगतान बहुत जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेश में अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए लंबित भुगतान, खासकर पिछले तीन महीनों के बकाया, जल्द से जल्द जारी किए जाने चाहिए।
सरकार का फंड जारी करने का यह फैसला 'सेहत' पहल के तहत हेल्थकेयर सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह पहल जम्मू-कश्मीर के लाखों निवासियों को कैशलेस मेडिकल इलाज की सुविधा देती है। हेल्थकेयर से जुड़े लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इस आर्थिक मदद से पैनल में शामिल अस्पतालों का भरोसा बढ़ेगा, मरीजों की देखभाल बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी और रीइम्बर्समेंट से जुड़ी चिंताओं का लंबे समय के लिए समाधान निकलेगा।
'आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत' योजना जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक जीवन रेखा है। यह योजना उन परिवारों को भी स्वास्थ्य बीमा का लाभ देती है जिनकी आय कम है या जो किसी भी आय वर्ग में नहीं आते। इस योजना के तहत, लाभार्थी पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त या बहुत कम खर्च पर इलाज करा सकते हैं। यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो महंगी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।
प्राइवेट अस्पतालों के हटने की चेतावनी ने लाखों लाभार्थियों की चिंता बढ़ा दी थी। अगर अस्पताल इस योजना से हट जाते, तो मरीजों को इलाज के लिए भारी भुगतान करना पड़ता, जो कई लोगों के लिए संभव नहीं होता। सरकार के इस कदम से न केवल अस्पतालों को राहत मिली है, बल्कि मरीजों को भी यह आश्वासन मिला है कि उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी।
यह मामला जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को भी उजागर करता है। प्राइवेट अस्पतालों का कहना है कि क्लेम के निपटारे में देरी से उनके लिए वित्तीय प्रबंधन मुश्किल हो जाता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो और योजनाओं का सुचारू संचालन बना रहे।
'सेहत' योजना के तहत, विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए एक निश्चित राशि का भुगतान सरकार द्वारा अस्पतालों को किया जाता है। यह राशि रीइम्बर्समेंट कहलाती है। जब इस रीइम्बर्समेंट में देरी होती है, तो अस्पतालों के पास नकदी की कमी हो जाती है, जिससे उनके संचालन पर असर पड़ता है।
सरकार ने 175 करोड़ रुपये का पैकेज जारी करके इस समस्या का तत्काल समाधान निकालने की कोशिश की है। यह राशि अस्पतालों के पिछले बकाया का भुगतान करने में मदद करेगी और उन्हें योजना के तहत सेवाएं जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उम्मीद है कि यह कदम अस्पतालों और सरकार के बीच विश्वास को फिर से स्थापित करेगा।
यह भी महत्वपूर्ण है कि सरकार ने अस्पतालों को भरोसा दिलाया है कि भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अस्पतालों को समय पर उनका पैसा मिले और वे बिना किसी वित्तीय दबाव के मरीजों की सेवा कर सकें।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम 'सेहत' योजना को बचाने और जम्मू-कश्मीर के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। यह दर्शाता है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दे रही है और नागरिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।