अमित शाह ने फिंगरप्रिंट सम्मेलन में कहा, वैज्ञानिक साक्ष्य और Ai से अपराधियों को पकड़ना होगा आसान
अमित शाह ने फिंगरप्रिंट सम्मेलन में कहा, वैज्ञानिक साक्ष्य और AI से अपराधियों को पकड़ना होगा आसान
NewsPoint•
गृह मंत्री अमित शाह ने फिंगरप्रिंट सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली को बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य को साबित करना और डेटा को इंटेलिजेंस में बदलना महत्वपूर्ण है। एनएफआईएस-नफिस का उपयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रशिक्षण ऐप के उपयोग से आगे बढ़कर वैज्ञानिक साक्ष्य सृजित करने तक होना चाहिए। सीसीटीएनएस का शत-प्रतिशत विस्तार हो चुका है।
नई दिल्ली, 19 जून। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साक्ष्य इकट्ठा करने से लेकर चार्जशीट दाखिल करने तक पुलिस को वैज्ञानिक तरीके से सबूत साबित करने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। एनसीआरबी के डायरेक्टर आलोक रंजन, सीएफएसएल के निर्देशक एसके जैन, एनसीआरबी के संयुक्त निर्देशक संजय माथुर और कई राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस सम्मेलन में मौजूद रहे, जबकि कई अन्य वर्चुअल रूप से जुड़े। गृह मंत्री ने कहा कि नए कानूनों के तहत सूचना को इंटेलिजेंस में बदलना और फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए डेटा का विश्लेषण करना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधियों को पकड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएफआईएस-नफिस) के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि इसका उपयोग अभी केवल 10 फीसदी ही हो रहा है, जबकि यह जटिल मामलों को सुलझाने में बड़ी मदद कर सकता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज हमारा देश आपराधिक न्याय प्रणाली में एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। पहले थाने सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने का जरिया माने जाते थे, जहां विवादों को सुलझाया जाता था या फिर मामले सालों-साल अदालतों में लंबित रहते थे। आजादी के बाद से थानों का स्वरूप बदला और वे अपराध नियंत्रण का केंद्र बनने लगे। जांच-पड़ताल शुरू हुई, अपराधियों को पकड़ा जाने लगा और उन्हें अदालत तक पहुंचाने में थानों की भूमिका अहम हो गई। अब समय आ गया है कि हम आपराधिक न्याय प्रणाली को इतना मजबूत बनाएं कि देश का हर नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों को आसानी से प्राप्त कर सके।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साक्ष्य इकट्ठा करने और चार्जशीट दाखिल करने तक की प्रक्रिया में पुलिस को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है। तीन नए कानूनों के तहत वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य को साबित करना होगा। कोर्ट में सूचना को इंटेलिजेंस में बदलना बहुत जरूरी है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि कौरव पांडवों से कहीं ज्यादा शक्तिशाली थे, लेकिन पांडवों के साथ श्रीकृष्ण थे, जो सूचना को इंटेलिजेंस में बदलते थे। इसी वजह से पांडवों ने युद्ध जीता। ठीक उसी तरह, जब डेटा इंटेलिजेंस में बदल जाता है, तो एआई के जरिए उसका विश्लेषण करके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधियों को पकड़ा जा सकता है।
गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएफआईएस-नफिस) ने कई जटिल मामलों को सुलझाने में बड़ी मदद की है। लेकिन, उन्होंने यह भी माना कि नफिस का उपयोग अभी केवल 10 फीसदी ही हो रहा है। नफिस का सफल उपयोग तभी संभव है जब हर क्राइम सीन से मिले फिंगरप्रिंट से इसके डेटा को समृद्ध किया जाए। यह एक दो-तरफा प्रणाली है। यह अपराधी को साबित करने में बहुत उपयोगी है, लेकिन अपराध तभी साबित हो सकता है जब डेटा उत्पन्न हो।
उन्होंने प्रशिक्षण पर भी जोर दिया और कहा कि प्रशिक्षण केवल ऐप के उपयोग तक सीमित नहीं होना चाहिए। ऐप का उपयोग करके वैज्ञानिक साक्ष्य बनाने और चार्जशीट तक की प्रक्रिया का भी प्रशिक्षण देना होगा। इसके बाद अभियोजन और न्यायपालिका को भी प्रशिक्षित करना पड़ेगा कि यदि पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो अतिरिक्त साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है। न्यायपालिका और अभियोजन के काम को आसान बनाने के लिए आवश्यक बदलावों को नए कानूनों में शामिल कर लिया गया है।
पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि फिंगरप्रिंट, टेलीफोन रिकॉर्ड, चेहरा, आंख और डीएनए का मिलान होने के बाद भी यदि आप 250 साक्ष्यों के साथ कोर्ट में जाते हैं, तो तकनीक का क्या मतलब है? व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर अनुभवी अभियोजक तैयार करने होंगे। हमें जांच, अभियोजन और सजा की पूरी श्रृंखला में तकनीक के सक्रिय उपयोग के लिए बहुत अच्छे तरीके से काम करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सभी राज्य सरकारों और पुलिस के प्रयासों से आज अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) का शत-प्रतिशत विस्तार हो चुका है। देश के सभी 17,840 थानों में सीसीटीएनएस की पहुंच सुनिश्चित की गई है। आज हमारे पास 37 करोड़ 86 लाख फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (एफआईआर), लेगेसी डेटा सहित उपलब्ध हैं। ई-कोर्ट में 22 हजार अदालतें जुड़ चुकी हैं और उनके लेगेसी प्रॉसिक्यूशन डेटा को भी ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है। ई-प्रिजन में 2 करोड़ 70 लाख डेटा उपलब्ध है, जबकि ई-फॉरेंसिक में 34 लाख 48 हजार मामलों का फॉरेंसिक डेटा हमारे पास है। क्राइम का 43 लाख 16 हजार का अलर्ट डेटा भी उपलब्ध है।
गृह मंत्री ने कहा कि जिस दिन से वे गृहमंत्री बने हैं, वे लगातार कहते आ रहे हैं कि पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो (Police अनुसंधान और विकास ब्यूरो) और एनसीआरबी के बिना इस देश में अपराध नियंत्रण असंभव है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण कार्य को पहले इतनी तवज्जो नहीं दी गई थी। आने वाले दिनों में एनसीआरबी की बहुत बड़ी भूमिका रहने वाली है। फिंगरप्रिंट ब्यूरो भी हमारे उद्देश्य के लिए एक उपयोगी उपकरण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डेटा को इंटेलिजेंस में बदलना और फिर एआई का उपयोग करना भविष्य की राह है। यह सिर्फ अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली को अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि नए कानून आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने और इसे नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन कानूनों का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को तेज करना, साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ाना और अदालती कार्यवाही को सुगम बनाना है। फिंगरप्रिंट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य की भूमिका को और अधिक मजबूत किया जाएगा, जिससे निर्दोषों को न्याय मिले और दोषी को सजा। यह सब तभी संभव होगा जब पुलिसकर्मी और अन्य संबंधित अधिकारी इन नई तकनीकों और प्रक्रियाओं को पूरी तरह से अपनाएंगे और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करेंगे।
गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग केवल एक उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि एक एकीकृत प्रणाली के हिस्से के रूप में किया जाना चाहिए। इसमें डेटा संग्रह, विश्लेषण, अभियोजन और अंततः सजा तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसी प्रणाली विकसित करनी है जहां हर स्तर पर तकनीक का उपयोग हो, ताकि न्याय प्रणाली तेज, पारदर्शी और प्रभावी बन सके। यह देश के नागरिकों के विश्वास को मजबूत करेगा और उन्हें यह आश्वासन देगा कि कानून उनके साथ है।