एनएसई ने डीमैट खाते में गलती से जमा हुए शेयरों को बेचने पर कश्मीरी लाल राणा के खिलाफ दर्ज कराई FIR

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने एक व्यक्ति के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। यह व्यक्ति एनएसई के 5,000 शेयर अपने डीमैट खाते में गलती से जमा होने के बाद भी उन्हें बेचने का आरोपी है। इन शेयरों की बिक्री से लगभग 1.33 करोड़ रुपये मिले थे। एनएसई और नुवामा वेल्थ फाइनेंस ने दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा भी दायर किया है।

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। एक्सचेंज ने एक व्यक्ति, कश्मीरी लाल राणा के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि राणा के डीमैट खाते में गलती से NSE के 5,000 शेयर आ गए थे, और उन्हें यह पता होने के बावजूद कि ये शेयर उनके नहीं हैं, उन्होंने उनमें से 3,685 शेयर लगभग 1.33 करोड़ रुपये में बेच दिए। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। NSE और नुवामा वेल्थ फाइनेंस लिमिटेड ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक दीवानी मुकदमा भी दायर किया है, जिसमें बेचे गए शेयरों की रकम और बचे हुए शेयरों की वापसी की मांग की गई है।

DRHP के अनुसार, यह घटना दिसंबर 2023 में हुई जब NSE के 5,000 इक्विटी शेयर बिना किसी खरीद अनुरोध या भुगतान के गलती से कश्मीरी लाल राणा के डीमैट खाते में जमा हो गए। जब तक इस गड़बड़ी का पता चला, तब तक राणा ने कथित तौर पर 3,685 शेयर बेच दिए थे। इन बेचे गए शेयरों से लगभग 1.33 करोड़ रुपये की रकम प्राप्त हुई थी। NSE और नुवामा वेल्थ फाइनेंस लिमिटेड ने इस रकम की वसूली के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
इसके अलावा, वादियों ने अदालत से शेष बचे 1,315 शेयरों और उन पर मिले 5,260 बोनस शेयरों को भी वापस दिलाने की मांग की है। मई 2025 में, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत, मामले के अंतिम फैसले तक बचे हुए शेयरों और बोनस शेयरों की बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई थी। NSE ने DRHP में स्पष्ट किया है कि "यह मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है।"

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास दाखिल किए गए ड्राफ्ट दस्तावेजों के मुताबिक, NSE ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जुलाई 2025 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई थी। यह FIR कश्मीरी लाल राणा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत दर्ज की गई है जो आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित हैं।

NSE का आरोप है कि कश्मीरी लाल राणा को यह पता था कि ये शेयर उनके नहीं हैं, फिर भी उन्होंने उन्हें अपने पास रखा और बेच दिया। यह एक गंभीर मामला है जिसमें एक वित्तीय संस्थान के शेयरों का गलत इस्तेमाल हुआ है। इस घटना ने NSE के प्रस्तावित IPO के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में एक महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में जगह बनाई है, जो निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय हो सकता है।

यह मामला वित्तीय बाजारों में सुरक्षा और धोखाधड़ी से निपटने के महत्व को भी उजागर करता है। गलती से हुए लेनदेन को भी गंभीरता से लिया जा रहा है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जा रही है। NSE इस मामले को सुलझाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और अदालत के फैसले का इंतजार कर रहा है। इस घटना का NSE के IPO पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।

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