अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीति से भारतीय पेशेवर प्रभावित, एच 1बी वीजा एक्सटेंशन पर पड़ेंगे गंभीर प्रभाव
अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीति से भारतीय पेशेवर प्रभावित, एच-1बी वीजा एक्सटेंशन पर पड़ेंगे गंभीर प्रभाव
NewsPoint•
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक नई इमिग्रेशन नीति का प्रस्ताव दिया है, जिससे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस नई नीति के अंतर्गत, एच-1बी और एल-1 वीजा धारकों के वीजा एक्सटेंशन के आवेदन पर अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारी पहले के अनुमोदन को ध्यान में रखने के लिए बाध्य नहीं होंगे। इस बदलाव का सीधा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका में एच-1बी वीजा के तहत 79 प्रतिशत लाभार्थी भारतीय होते हैं। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने इसे 'रिमूविंग डिफरेंस टू प्रायोर यूएससीआईएस डिटरमिनेशंस ऑफ एलिजिबिलिटी' नाम दिया है। सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए अंतिम तिथि 13 नवंबर है, और यह प्रस्ताव 14 अक्टूबर को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया था।
डीएचएस के नए प्रस्ताव के चलते मौजूदा नियम, 8 सीएफआर 214.1(सी)(5), को हटाने की बात कही गई है। इस नियम के तहत, यदि किसी कर्मचारी का पहले वीजा मंजूर हो चुका है और उसके हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, तो अधिकारी को पहले के फैसले का सम्मान करना होता है। लेकिन अगर यह नया प्रस्ताव लागू होता है, तो एच-1बी और एल-1 के अलावा ओ-1, टीएन, ई और पी श्रेणी के वीजा आवेदनों पर भी पुनर्परीक्षा की जा सकती है। इसका मतलब है कि भले ही किसी कर्मचारी को पहले वीजा मिल चुका हो, अगली बार एक्सटेंशन की मांग पर उनके आवेदन की नई तरह से जांच की जाएगी।डीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में एच-1बी वीजा से जुड़े करीब 3.99 लाख आवेदनों को मंजूरी मिली, जिनमें से 71 प्रतिशत लाभार्थी भारत में जन्मे थे। लगातार रोजगार की श्रेणी में मंजूर करीब 2.58 लाख आवेदनों में से लगभग 2.03 लाख यानी 79 प्रतिशत भारतीय पेशेवरों के थे। यह सब तब हो रहा है जब डीएचएस के अनुसार, अमेरिकी इमिग्रेशन सेवा के पास आने वाले कुल फॉर्म आई-129 आवेदनों में एच-1बी वीजा की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक है। इस बदलाव के लागू होने पर हर साल करीब 2.08 लाख आवेदन प्रभावित होने की संभावना है।
नई नीति के कारण आवेदन में अतिरिक्त दस्तावेज और स्पष्टीकरण की मांग करने वाले नोटिस, जिसे रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस (आरएफई) कहते हैं, की संख्या में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मतलब है कि हर साल करीब 6,000 अतिरिक्त नोटिस जारी किए जा सकते हैं। यह सही है कि जिन आवेदनों पर अतिरिक्त जानकारी मांगी जाती है, उन्हें निपटाने में औसतन 64 दिन अधिक लग सकते हैं। ये आंकड़े पिछले चार वित्त वर्षों के औसत पर आधारित हैं।
डीएचएस ने इस प्रक्रिया के कारण आवेदकों और कंपनियों पर पड़ने वाली अतिरिक्त लागत को सालाना 1.34 लाख डॉलर आंका है। विभाग का तर्क है कि वर्तमान नियम आवेदक के मुकाबले इमिग्रेशन अधिकारी पर यह साबित करने की ज़िम्मेदारी डालता है कि पहले के फैसले से क्यों हटना है। डीएचएस के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव से अधिकारी प्रत्येक आवेदन के हालात के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेंगे।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने कार्यस्थलों की निरीक्षण से जुड़े आंकड़े भी पेश किए हैं। विभाग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022 से 2025 के दौरान एच-1बी एक्सटेंशन से जुड़े कार्यस्थलों में नियमों के उल्लंघन और धोखाधड़ी के मामले 22 प्रतिशत पाए गए। इसके विपरीत, वित्त वर्ष 2018 से 2020 के बीच यह आंकड़ा लगभग 17 प्रतिशत था। विभाग ने स्पष्ट किया है, "ये आंकड़े उस दौर के हैं जब पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देने की व्यवस्था लागू थी और उससे पहले के उस दौर के हैं जब यह व्यवस्था नहीं थी।"
हालांकि, डीएचएस ने कहा है कि अधिकारी पुराने वीजा अनुमोदन को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करेंगे। वे पहले के फैसलों को ध्यान में रख सकेंगे, लेकिन उनके लिए उन अनुमोदनों को आधार बनाकर आगे बढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। विभाग ने यह भी माना है कि ये बदलाव उन कर्मचारियों और कंपनियों की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं, जिन्होंने अमेरिका में काम करने और ठहरने की अवधि को लेकर अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े फैसले पहले वीजा अनुमोदन के आधार पर किए थे।
अमेरिका में पिछली वीजा मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति में पहले भी कई बदलाव हो चुके हैं। इसे 2004 में लागू किया गया था, फिर 2017 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इसे खत्म कर दिया गया था। बाद में 2021 में इसे फिर से बहाल किया गया और 2024 में इसे औपचारिक रूप से आव्रजन नियमों में शामिल किया गया।
इस नए प्रस्ताव पर सभी की नजरें हैं, खासकर भारतीय पेशेवरों की। यह परिवर्तन उन्हें नई चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर कर सकता है। इसलिए, सभी को इस पर अपनी राय देने के लिए समय सीमा 13 नवंबर का इंतजार करना होगा।