उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की विधानसभा चुनाव में बढ़ी महत्वपूर्णता, 2027 में सभी दलों की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की विधानसभा चुनाव में बढ़ी महत्वपूर्णता, 2027 में सभी दलों की तैयारी तेज
NewsPoint•
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के आस-पास सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों को तेज करना शुरू कर दिया है। हरदोई, जो 8 विधानसभा सीटों का हकदार है, इस बार पूरे ध्यान का केंद्र बन गया है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जो भी दल यहां जीत दर्ज करेगा, उसका अवध और रुहेलखंड क्षेत्रों पर बड़ा सियासी असर होगा। 2022 के विधानसभा चुनाव में सभी 8 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। ऐसे में विपक्ष अब हरदोई में सेंध लगाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है।
हरदोई का इतिहास भी बहुत प्राचीन है। माना जाता है कि इसका संबंध हिरण्यकश्यप से है। इसके पौराणिक नाम हरिद्रोही रहा है, जिसका मतलब है भगवान का द्रोही। कहा जाता है कि हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद के विद्रोह के बाद इसे हरि-द्रोही नाम दिया था, जिसे आगे चलकर हरदोई में बदल दिया गया। द्वापर युग की प्रसिद्ध तीर्थस्थली नैमिषारण्य भी हरदोई से मात्र 45 किमी दूर है, जो इस जिले को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।भौगोलिक दृष्टि से हरदोई जिला लखनऊ कमिश्नरी का हिस्सा है। इसकी उत्तरी सीमा शाहजहांपुर और लखीमपुर खीरी से लगती है। दक्षिण में लखनऊ और उन्नाव हैं, जबकि पश्चिम में कानपुर और फर्रुखाबाद हैं। पूर्व में गोमती नदी इसे सीतापुर से अलग करती है। हरदोई का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 5989 वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की कुल जनसंख्या 40,92,845 है, जिसमें 21,91,442 पुरुष और 19,01,403 महिलाएं शामिल हैं।
प्रशासनिक दृष्टि से, हरदोई में 5 तहसील हैं - हरदोई, शाहाबाद, बिलग्राम, संडीला और सवायजपुर। यहां 191 न्याय पंचायत, 1306 ग्राम सभा और 1907 आबाद गांव भी हैं। इसके साथ-साथ यहां 7 नगर पालिका परिषद और 6 नगर पंचायत भी हैं। हरदोई का निकटतम हवाई अड्डा चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लखनऊ में स्थित है। यह हरदोई से 119 किलोमीटर की दूरी पर है।
हरदोई जिले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे तीन प्रमुख नदियों द्वारा सींचा जाता है। गोमती नदी, रामगंगा और सई नदी यहां की प्रमुख नदियां हैं। इनमें गोमती नदी जिले की पूर्वी सीमा है। राजनीतिक दृष्टि से, हरदोई जिले में 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं: सवायजपुर, शाहाबाद, हरदोई, गोपामऊ, सांडी, बिलग्राम-मल्लांवा, बालामऊ और संडीला। लोकसभा के हिसाब से, हरदोई संसदीय सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में, भाजपा के जय प्रकाश रावत ने सपा की उषा वर्मा को 27,856 वोटों के अंतर से हराया था। उस चुनाव में यहां 57.52 फीसदी मतदान हुआ था। हरदोई क्षेत्र में जातीय समीकरण हमेशा से ही निर्णायक रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, हरदोई लोकसभा सीट पर 85.55 फीसदी ग्रामीण और 14.45 फीसदी शहरी आबादी रह गई है। अनुसूचित जाति की आबादी यहां करीब 30.79 फीसदी है, जबकि मुस्लिम मतदाता लगभग 13 फीसदी हैं। कुर्मी और ब्राह्मण मतदाता दूसरे महत्वपूर्ण समूह हैं, और बड़ी ओबीसी आबादी भी चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इसीलिए, 2027 चुनावों से पहले सभी दलों ने हरदोई में सॉफ्टवेयर स्तर तक अपनी तैयारी शुरू कर दी है। यहां बूथ स्तर पर भी काम किया जा रहा है। आने वाले दिनों में हरदोई में बड़े नेताओं के दौरे भी बढ़ेंगे। हरदोई की सियासत ताजा और रोचक बनेगी, क्योंकि सभी दल यहां अपनी ताकत बढ़ाने के लिए जुटे हैं। अब देखना यह है कि कौन सा दल यहां जीत हासिल करता है और आगे की राजनीति को कैसे प्रभावित करता है।