Ladki Bahin Yojana 71 Lakh Beneficiaries Declared Ineligible Shiv Sena Ubt Questions Government
मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना: 71 लाख लाभार्थी अयोग्य घोषित, शिवसेना (उबाठा) का सरकार पर सवाल
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महाराष्ट्र सरकार की मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना पर शिवसेना (उबाठा) ने सवाल उठाए हैं। 71 लाख महिलाओं को अचानक अयोग्य घोषित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी न करने के कारण खाते बंद हुए। अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दी गई है। इससे कई महिलाओं को राहत मिल सकती है।
पुणे, पांच अप्रैल (भाषा) शिवसेना (उबाठा) की नेता सुषमा अंधारे ने महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन’ योजना को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि इस योजना के तहत लाभ पाने वाली 71 लाख महिलाओं को अचानक अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। अंधारे ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे को पहले यह साफ करना चाहिए कि आखिर इन 71 लाख महिलाओं को क्यों अयोग्य ठहराया गया।
सुषमा अंधारे ने आरोप लगाया कि यह योजना विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई थी और इन 71 लाख महिलाओं को कुल 255.60 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के खजाने को हुए इस भारी नुकसान की भरपाई कौन करेगा। अंधारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मंत्री अदिति तटकरे से इस मामले में जवाब मांगा। उन्होंने यह भी पूछा कि इन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला क्यों दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। अंधारे का कहना है कि चुनाव जीतने के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल किया गया।हालांकि, राज्य सरकार के अधिकारियों ने बुधवार को इस मामले पर सफाई दी थी। उन्होंने बताया कि ‘लाडकी बहिन’ योजना के तहत लगभग 68 लाख खाते इसलिए बंद कर दिए गए क्योंकि लाभार्थियों ने तय समय सीमा से पहले ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। ई-केवाईसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे आपकी पहचान की पुष्टि होती है। इस वजह से योजना में सक्रिय खातों की संख्या घटकर करीब 1.75 करोड़ रह गई थी। ई-केवाईसी पूरा करने की आखिरी तारीख 31 मार्च थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि ई-केवाईसी की समय सीमा बढ़ाने के बाद बंद खातों की संख्या में बदलाव आ सकता है। यानी, जो महिलाएं अब ई-केवाईसी पूरा कर लेंगी, उनके खाते फिर से सक्रिय हो सकते हैं। इस विस्तार से उन 71 लाख महिलाओं को राहत मिल सकती है जिन्हें फिलहाल अयोग्य घोषित किया गया है। यह देखना बाकी है कि इस नई समय सीमा का कितना असर पड़ता है और कितनी महिलाएं अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर पाती हैं।