FY2027 में राज्यों का कर्ज: 14 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान, RBI की नई रणनीति

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वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्यों पर कर्ज का बोझ बढ़कर 14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल से अधिक है। भारतीय रिजर्व बैंक ने उधार योजनाओं की रूपरेखा तैयार कर ली है। आरबीआई ने पहली तिमाही के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। एक नई 'बेंचमार्क इश्यूएंस स्ट्रेटेजी' शुरू की गई है।

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नई दिल्ली [भारत], 6 अप्रैल (एएनआई): एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकारों से 13.4 लाख करोड़ से 14 लाख करोड़ रुपये तक की उधारी की उम्मीद है। यह पिछले साल की तुलना में 5 से 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस उधारी में से, 4.2 लाख करोड़ रुपये का पुनर्भुगतान (redemptions) भी शामिल है। इसलिए, शुद्ध राज्य सरकारी प्रतिभूतियों (SGS) का जारी होना 9.2 से 9.7 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। यह पिछले साल यानी FY2026 में जारी हुए 9.0 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 1 से 8 प्रतिशत की वृद्धि है।

यह रिपोर्ट रेटिंग एजेंसी ICRA द्वारा जारी की गई है। ICRA का अनुमान है कि FY2027 में कुल SGS जारी करना 13.4 से 14.0 लाख करोड़ रुपये के बीच होगा। यह FY2026 में जारी हुए 12.8 लाख करोड़ रुपये से 5 से 9 प्रतिशत अधिक है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले ही FY2027 की पहली तिमाही के लिए उधार योजनाओं की रूपरेखा तैयार कर ली है। RBI ने Q1 FY2027 के लिए कुल SGS जारी करने का लक्ष्य 2.5 लाख करोड़ रुपये रखा है। यह पिछले साल की पहली तिमाही की तुलना में 26.7 प्रतिशत अधिक है।

इस साल की उधार रणनीति की एक खास बात है 'बेंचमार्क इश्यूएंस स्ट्रेटेजी' (BIS)। इसे RBI ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया है। इस योजना के तहत, नौ राज्य मिलकर 1.5 लाख करोड़ रुपये का उधार लेंगे। वे एक तयशुदा अवधि वाली प्रतिभूतियां जारी करेंगे।

इस तरीके का मकसद यह है कि समय के साथ राज्य सरकारों की प्रतिभूतियों की यील्ड कर्व (yield curve) को और बेहतर बनाया जा सके। इससे राज्य सरकारों के उधार लेने की प्रक्रिया में तरलता (liquidity) और पारदर्शिता (transparency) बढ़ेगी।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि BIS को प्रभावी बनाने के लिए, भाग लेने वाले राज्यों को अपनी वास्तविक उधारी को उन तयशुदा अवधियों के अनुसार ही जारी करना होगा।

हाल के वर्षों में, पहली तिमाही में तय की गई उधारी राशि और वास्तव में जारी की गई राशि के बीच एक बड़ा अंतर देखा गया है। इस वजह से ऐसी रणनीतियों का पूरा फायदा नहीं मिल पाया है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इस अंतर को कम किया जा सकता है। इसके लिए राज्यों को अपनी उधार सीमा तय करने के लिए भारत सरकार को आवश्यक जानकारी जल्दी देनी होगी। केंद्र सरकार द्वारा उधार सीमाओं की जांच, मंजूरी और संचार में तेजी लाने से भी यह प्रक्रिया सुचारू हो सकती है।

यह BIS योजना राज्य सरकारों के लिए एक नया तरीका है। इसका उद्देश्य उधार लेने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है। लेकिन, इसके सफल होने के लिए राज्यों को भी सहयोग करना होगा। उन्हें अपनी योजनाओं को RBI के बताए ढांचे के अनुसार लागू करना होगा। अगर राज्य समय पर जानकारी देते हैं और केंद्र सरकार भी तेजी से मंजूरी देती है, तो यह योजना राज्य सरकारों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे उन्हें बाजार से आसानी से और बेहतर शर्तों पर पैसा जुटाने में मदद मिलेगी।

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