Delhi Budget 2026 27 Cm Rekha Guptas Important Meetings With Gig Workers And Farmers Emphasis On Public Participation
दिल्ली बजट 2026-27: सीएम रेखा गुप्ता की आम आदमी से अहम बैठकें, गिग वर्कर्स और किसानों की मांगों पर फोकस
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट 2026-27 को अंतिम रूप देने के लिए आम लोगों से मुलाकात की। उन्होंने गिग वर्कर्स और किसानों की मांगों पर विशेष ध्यान दिया। बेहतर काम की स्थितियां, सामाजिक सुरक्षा और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने जनता की भागीदारी को विकसित दिल्ली की सबसे बड़ी ताकत बताया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट 2026-27 को सभी वर्गों की जरूरतों के हिसाब से बनाने के लिए गुरुवार को दिल्ली सचिवालय में कई समूहों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने गिग वर्कर्स, किसानों, ग्रामीण प्रतिनिधियों और मजदूर समूहों से उनकी समस्याएं, सुझाव और उम्मीदें जानीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली को विकसित बनाने में जनता की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी की बातों को बजट में प्राथमिकता दी जाएगी। इस दौरान श्रम मंत्री कपिल मिश्रा और दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड के चेयरमैन राजकुमार चौहान भी मौजूद रहे।
गिग वर्कर्स और ड्राइवरों ने काम करने की बेहतर परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा के लिए ठोस नीतियों की मांग की। उन्होंने ड्राइवरों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित पार्किंग की सुविधा बनाने की बात कही। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और महिलाओं को ई-व्हीकल खरीदने पर सब्सिडी देने का भी सुझाव दिया। सामाजिक सुरक्षा के तहत, गिग वर्कर्स को प्रॉविडेंट फंड (PF) सिस्टम से जोड़ने और स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करने की मांग उठी। कई प्रतिनिधियों ने गिग वर्कर्स को 'पार्टनर' की जगह 'कर्मचारी' का दर्जा देने की वकालत की। उन्होंने उनकी समस्याओं को सुनने और उनके हितों की रक्षा के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का भी प्रस्ताव दिया।इसके अलावा, ड्राइवरों और मजदूरों के लिए आराम करने की जगहें बनाने, सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़ाने और ट्रैफिक नियमों में व्यावहारिक सुधार लाने की भी मांग की गई। प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य के श्रम कानूनों में अंतर पर भी चिंता जताई और कहा कि इन्हें एक जैसा बनाया जाए ताकि मजदूरों को लाभ ठीक से मिल सके।
किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई मांगें रखीं। उन्होंने सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने, ग्रामीण सड़कों का विकास करने और मंडी सिस्टम में सुधार करने की बात कही। गांवों में जल निकासी, स्वच्छता, पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को अपग्रेड करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
किसानों ने दिल्ली में अपने दर्जे को औपचारिक मान्यता देने और कृषि सब्सिडी व प्रोत्साहन योजनाओं की मांग की। भूमि एकीकरण (land pooling) और चकबंदी (consolidation) से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया। इन नीतियों को किसानों के लिए अधिक अनुकूल और प्रभावी बनाने के सुझाव दिए गए। उन्होंने कृषि भूमि के सर्किल रेट्स को संशोधित करने के लिए सर्वे कराने, उचित मुआवजा तंत्र स्थापित करने और बेहतर भूमि विकास नीतियां बनाने की भी मांग की। बिजली सब्सिडी, बेहतर पेयजल आपूर्ति और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए कृषि मंडियों को फिर से चालू करने की अतिरिक्त मांगें भी रखी गईं।
किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तक व्यापक पहुंच की मांग की। ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के लिए बैंक लोन आसानी से उपलब्ध कराने और लोन वितरण में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर भी जोर दिया गया। फसल बीमा योजनाओं के उचित कार्यान्वयन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने व उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "विकसित दिल्ली की सबसे बड़ी ताकत जन भागीदारी है।" उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसा बजट पेश करना है जो हर वर्ग की आकांक्षाओं को दर्शाता हो।