राहुल गांधी का पीएम मोदी की बचत अपील पर पलटवार: भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना

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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बचत अपील पर भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति केवल सत्ता हासिल करने तक सीमित है। भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया।

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नई दिल्ली, 11 मई (भाषा) पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से बचत करने की अपील पर भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा ने राहुल गांधी के इस बयान को खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री की अपील "नाकामी का सबूत" है और कहा कि कांग्रेस की राजनीति केवल सत्ता हासिल करने तक सीमित है, राष्ट्र निर्माण से उसका कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया और पूछा कि क्या नेहरू भी तब "कम्प्रोमाइज्ड पीएम" थे जब उन्होंने महंगाई पर युद्धों के असर की बात कही थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संभावित आर्थिक असर से निपटने के लिए देशवासियों को कुछ सुझाव दिए थे, जिसमें ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीदारी और विदेश यात्रा को टालना, खाने के तेल की खपत कम करना, रासायनिक खाद का कम इस्तेमाल, प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना शामिल है। इन सुझावों को राहुल गांधी ने "नाकामी का सबूत" करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री देश को इस मुकाम पर ले आए हैं कि जनता को बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदें और क्या न खरीदें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री हर बार जिम्मेदारी जनता पर डालकर खुद जवाबदेही से बच निकलते हैं।
भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से त्याग करने के लिए नहीं कहा है, बल्कि राष्ट्र हित में सोच-समझकर फैसले लेने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का आशय ईंधन बचाने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, विदेशी मुद्रा बचाने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने से था। मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, "लेकिन यही कांग्रेस पार्टी की समस्या है। राष्ट्र हित में जनता की भागीदारी की कोई भी अपील उन्हें 'उपदेश' जैसी लगती है, क्योंकि उनकी राजनीति सिर्फ सत्ता तक ही सीमित रही है, राष्ट्र-निर्माण तक नहीं।"

मालवीय ने राहुल गांधी के "कम्प्रोमाइज्ड पीएम" वाले बयान पर पलटवार करते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर जनता से अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील करना 'नाकामी' माना जाता है, तो क्या आपके प्रिय नेहरू भी 'कम्प्रोमाइज्ड पीएम' थे?" मालवीय ने नेहरू के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा, "नेहरू ने खुद कहा था कि जब दूसरे देशों में जंग छिड़ती है, तो उसका असर भारत में महंगाई के रूप में महसूस होता है। क्या वह भी तब एक 'बहाना' था, या उस समय इसे ज़िम्मेदार नेतृत्व माना जाता था?" उन्होंने नेहरू का एक कथित वीडियो भी साझा किया जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जब कोरिया या अमेरिका जैसे देशों में जंग होती है तो भारत पर असर पड़ता है।

भाजपा नेता ने इस बात पर जोर दिया कि जिम्मेदार नेतृत्व लोगों को सच बताता है और चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर भागीदारी की अपील करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष के बुरे असर से लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई उपाय सुझाए थे। उन्होंने हैदराबाद में तेलंगाना इकाई की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया में संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल की खपत कम करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का इस्तेमाल करने, कार पूलिंग करने, इलेक्ट्रिक गाड़ियों का अधिक इस्तेमाल करने, पार्सल लाने-ले जाने के लिए रेलवे सेवाओं का इस्तेमाल करने और घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने जैसे सुझाव भी दिए थे।

प्रधानमंत्री ने संकट के कारण विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत पर जोर देते हुए एक साल के लिए सोने की खरीदारी और विदेश यात्रा टालने की भी अपील की थी। उन्होंने खाने के तेल की खपत कम करने, रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। इन सुझावों का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाना और आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।

राहुल गांधी ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री के सुझावों को सीधे तौर पर "नाकामी के सबूत" बताया था। उन्होंने लिखा था, "मोदी जी ने कल जनता से त्याग की मांग की कि सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल का कम उपयोग करो, खाद और खाने का तेल कम उपयोग करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं, बल्कि नाकामी के सबूत हैं।" उन्होंने आगे कहा, "12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है कि क्या ख़रीदें, क्या न ख़रीदें, कहां जाएं, कहां न जाएं। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।"

भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। उनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे समय में, सरकार का प्रयास है कि देशवासी समझदारी से काम लें और ऐसे कदम उठाएं जिनसे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। यह अपील किसी कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नेतृत्व का उदाहरण है जो कठिन समय में जनता को साथ लेकर चलने का प्रयास करता है। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस को राष्ट्र निर्माण के ऐसे प्रयासों का समर्थन करना चाहिए, न कि उन पर राजनीति करनी चाहिए।

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