बतौर हेल्थ मिनिस्टर दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं का रिपोर्ट कार्ड कैसे देखते हैं?
पिछले 11 साल में अस्पतालों की ऐसी स्थिति बन गई थी कि इसे ठीक करने में एक साल लग चुका है, अभी तक हम रिपेयर मोड में हैं। आरोग्य मंदिर में पिछले एक साल में 14 लाख 50 हजार मरीजों ने इलाज कराया, यह बहुत बड़ी संख्या है। 370 आरोग्य मंदिर की शुरुआत हुई है, 750 और आरोग्य मंदिर बनाए जाने हैं। इससे प्राइमरी केयर मिलेगा, बड़े अस्पतालों में भीड़ कम होगी। स्पेशलाइज्ड ट्रीटमेंट पर डॉक्टर ज्यादा समय दे पाएंगे। किडनी मरीजों के लिए 150 डायलिसिस यूनिट की शुरुआत की गई है, अस्पतालों में दवा की किल्लत कम हुई है, अब 95 से 98% तक दवा मिल रही है।जहां करीब 21% तक पद खाली थे, अब केवल 3 से 4 % ही खाली हैं। A ग्रेड के पद खाली हैं, इसे यूपीएससी के जरिए भर्ती किया जाना है, इसलिए देरी हो रही है।
 अक्सर MRI की लंबी डेट मिलती है, इससे प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है?
अलग-अलग अस्पतालों में 12 MRI, 20 सीटी स्कैन और 30 अल्ट्रासाउंड मशीनें इंस्टॉल कर रहे हैं। इसे पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है, इसमें जो कंपनी मशीन देगी, जांच के लिए एक्सपर्ट भी उन्हीं का होगा। जांच में तेजी आएगी, जांच के लिए इंतजार नहीं करना होगा। दिल्ली सरकार के सभी बड़े अस्पतालों में MRI और सीटी स्कैन मशीन लगाई जाएंगी।
 इकनॉमिक सर्वे के अनुसार दिल्ली में पर्याप्त बेड्स नहीं है, इसका हल क्या है?
मादीपुर हॉस्पिटल में 691, सिरसपुर में 1164, विकासपुरी में 691, ज्वालापुरी में 691, शालीमार बाग में 1430, किराड़ी में 458, सुल्तानपुरी में 525, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में 610, जीटीबी में 1912, सरिता विहार में 336 और 1565 बेड्स के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। 13 अस्पतालों का एक्सटेंशन हो रहा है। अगले 6 महीने में सुधार दिखने लगेगा।
इमरजेंसी में अक्सर मरीजों को इलाज नहीं मिलता, कैसे निजात मिलेगी?
इमरजेंसी में लाइफ सेविंग की स्थिति में मरीज को गोल्डन आवर में इलाज मिले, इसके लिए हम प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर अपने प्रमुख अस्पतालों में क्रिटिकल केयर यूनिट शुरू करने जा रहे हैं। 9 अस्पतालों में इस तरह की यूनिट्स की शुरुआत की जाएगी। अभी दिल्ली सरकार के अस्पतालों में इस प्रकार की क्रिटिकल केयर यूनिट्स नहीं है। हम अगले हफ्ते इसका टेंडर जारी करेंगे।
 पूर्वी दिल्ली के चारों अस्पतालों को आपस में इंटिग्रेटेड करने के पीछे क्या मकसद है?
जीटीबी, राजीव गांधी, कैंसर हॉस्पिटल और इहबास आसपास है। चारों को आपस में जोड़ने से डॉक्टर और स्टाफ सभी एक सिस्टम में आ जाएंगे, इससे इलाज में तेजी आएगी। अभी एक डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट अलग-अलग अस्पतालों में काम कर रहे हैं, किसी अस्प्ताल में स्टाफ ज्यादा है तो कहीं कम है। ऐसे में जहां पर मरीजों की संख्या ज्यादा है, वहां के स्टाफ प्रेशर में होते हैं। वहीं दूसरी ओर जहां मरीज कम हैं, उन पर कोई प्रेशर नहीं होता है। हम सभी सुविधाओं के साथ साथ ह्यूमन रिसोर्स को भी बेहतर मैनेजमेंट की योजना बनाई है।
 EWS योजना के तहत अक्सर गरीबों को इलाज नहीं मिलने की शिकायत रहती है?
EWS के तहत प्राइवेट अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए रिजर्व 10 पर्सेंट बेड्स का इस्तेमाल बढ़ा है, ढाई लाख ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ है। हमने साफ आदेश दिया है कि जिन मरीजों को प्राइवेट में इलाज की जरूरत है, अस्पताल में वेंटिंग है, उन्हें इस योजना से जुड़े अस्पतालों में भेजा जाए। साथ में नोडल ऑफिसर तैनात किया गया है। हिदायत है कि अगर इलाज नहीं मिला तो एक्शन के लिए तैयार रहें। इसके अलावा हमारी सरकार ने ईडब्ल्यूएस कैटिगरी को ढाई लाख से बढ़कार 5 लाख कर दिया है।
 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, सरकार क्या कुछ प्लान कर रही है, इसका क्या स्टेटस है?
सर्वाइकल कैंसर का वैक्सीनेशन प्रोग्राम चल रहा है। इसमें जांच और इलाज भी किया जा रहा है। लेकिन ब्रेस्ट कैंसर के लिए हम क्लस्टर वाइज जांच और इलाज की पहल शुरू करने जा रहे हैं। कोशिश है कि हर हॉस्पिटल में कम से कम ब्रेस्ट कैंसर की जांच और कैंसर स्पेशलिस्ट सेंटर में इलाज हो। हम जल्द इस योजना को शुरू करने वाले हैं।
 पिछले साल आयुष सोसायटी बनाई गई थी, इसके पीछे का क्या मकसद है?
पिछले साल दिल्ली स्टेट आयुष सोसायटी की स्थापना की गई थी, इस साल इसके लिए 60 करोड़ का बजट दिया गया है। दरअसल हमारा मकसद है कि आयुष के जरिए स्ट्रेस मैनेजमेंट किया जाए। इसलिए हम शुरू में 5 सेंटरों में पंचकर्म शुरू कर रहे हैं।
 आयुष्मान भारत योजना शुरु होने के समय तो खूब चर्चा में थी, अब इस पर कम बात क्यों हो रही है?
हमने 5 लाख के फ्री इलाज पर 5 लाख का टॉपअप दे रखा है। हम फेज वाइज लाभार्थियों को इससे जोड़ रहे हैं। 35 हजार मरीज इस योजना का लाभ उठा चुके हैं और इसमें से 27 हजार मरीजों के इलाज का पेमेंट योजना से जुड़े अस्पतालों का किया जा चुका है, इसके तहत अब तक 65 करोड़ रुपये पेमेंट हो चुका है।

