Jnu Action On Students Storm Of Protest Student Union Suspended Teachers Association Front Against Vc
JNU में ऐक्शन के बाद विरोध की गूंज
नवभारत टाइम्स•
जेएनयू में छात्र संघ के पदाधिकारियों और छात्रों को निष्कासित करने के बाद विरोध की लहर दौड़ गई है। छात्र संघ और शिक्षक संघ ने प्रशासन के इस कदम को दमनकारी बताया है। उन्होंने निष्कासन आदेश तुरंत वापस लेने की मांग की है।
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र संघ के चार पदाधिकारियों सहित पांच छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित (रस्टिकेट) कर दिया गया है। इस फैसले के विरोध में छात्र और शिक्षक एकजुट हो गए हैं। जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने इसे प्रशासन का दमनकारी कदम बताया है, जबकि जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने भी वाइस चांसलर के खिलाफ आवाज उठाई है। दोनों संगठनों ने निष्कासन आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। जेएनयूएसयू का आरोप है कि यह कार्रवाई छात्र संघ को कमजोर करने की कोशिश है, खासकर तब जब वे यूजीसी इक्विटी नियमों पर रोक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले थे। प्रशासन ने यह कार्रवाई 21 नवंबर को डॉ. बी. आर. आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी आधारित एक्सेस गेट्स में तोड़फोड़, हिंसा और पढ़ाई व प्रशासनिक काम में बाधा डालने के आरोप में की है, हालांकि छात्र संघ ने इन आरोपों से इनकार किया है।
इस फैसले के विरोध में जेएनयू कैंपस में देर रात सभी छात्र संगठनों की बैठक हुई और एकजुट होकर विरोध करने का फैसला लिया गया। मंगलवार रात को छात्रों ने इस कार्रवाई के अलावा, यूजीसी इक्विटी रूल्स और रोहित वेमुला एक्ट की मांग को लेकर मशाल जुलूस भी निकाला। जेएनयू प्रशासन ने 2 फरवरी को जेएनयूएसयू के प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट के. गोपिका, जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव, जॉइंट सेक्रेटरी दानिश अली और पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार को विंटर और मॉनसून सेमेस्टर 2026 तक के लिए निष्कासित किया है। इन सभी छात्रों को कैंपस में प्रवेश से रोक दिया गया है और 10 दिन के अंदर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, प्रदर्शन में शामिल 19 अन्य छात्रों पर 19-19 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।जेएनयूएसयू के जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव ने कहा कि प्रशासन ने यह कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि हमने छात्रों के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने बताया कि छात्र लंबे समय से सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए मैग्नेटिक गेट्स और फेस-रिकग्निशन कैमरों, यानी निगरानी प्रणाली का विरोध कर रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने निजीकरण (प्राइवेटाइजेशन), अरावली क्षेत्र से जुड़े मुद्दों और यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस पर रोक लगाने के खिलाफ भी प्रदर्शन किया था।
छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि वे अपनी आवाज न उठा सकें। फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी एक ऐसी तकनीक है जो चेहरे की पहचान करती है। इसे लाइब्रेरी में इसलिए लगाया गया था ताकि कौन अंदर आ रहा है और कौन बाहर जा रहा है, इसका पता लगाया जा सके। लेकिन छात्रों का मानना है कि यह उनकी निजता का उल्लंघन है और उन पर निगरानी रखने का एक तरीका है।
जेएनयूएसयू ने प्रशासन पर छात्र संघ को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब वे यूजीसी इक्विटी नियमों में बदलाव के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे थे, तभी यह आदेश जारी कर दिया गया। यूजीसी इक्विटी नियम शिक्षा में समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाए जाते हैं। इन नियमों पर रोक लगाने का मतलब है कि गरीब और वंचित तबके के छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में मुश्किल हो सकती है।
जेएनयूटीए, यानी जेएनयू शिक्षक संघ ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है। शिक्षकों का मानना है कि छात्रों की आवाज को दबाना गलत है और प्रशासन को बातचीत के जरिए मसलों को सुलझाना चाहिए। उन्होंने वाइस चांसलर से निष्कासन आदेश वापस लेने की मांग की है।
यह पूरा मामला जेएनयू कैंपस में छात्रों और प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है। छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि प्रशासन उन्हें रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। इस तरह की कार्रवाई से कैंपस का माहौल अशांत हो सकता है और छात्रों के अधिकारों पर सवाल उठ सकते हैं।