पीने के गंदे पानी से फैल रही हैं बीमारियां : रिपोर्ट

नवभारत टाइम्स

हरियाणा में गंदा पानी पीने से बीमारियां फैल रही हैं। पिछले पांच सालों में तेज दस्त के 38,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। पुरानी पाइपलाइनें और सीवेज से पानी का मिलना समस्या बढ़ा रहा है। गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे शहरों में भी यह स्थिति गंभीर है। लोग नल के पानी की जगह आरओ या टैंकर का सहारा ले रहे हैं।

पीने के गंदे पानी से फैल रही हैं बीमारियां : रिपोर्ट
हरियाणा में पीने का पानी अब लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन गया है। केंद्र सरकार की एक हालिया हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में पानी से होने वाली बीमारियों के मामले लगातार बढ़े हैं। यह सिर्फ मौसम की वजह से नहीं, बल्कि पानी सप्लाई की व्यवस्था में गंभीर खामियों के कारण हो रहा है। इस दौरान 38,000 से ज्यादा लोगों को एक्यूट डायरियल डिजीज (ADD) यानी तेज दस्त की शिकायत हुई है। यह बीमारी गंदा पानी पीने से फैलती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हरियाणा के कई गांवों में दशकों पुरानी पाइपलाइनें अभी भी इस्तेमाल हो रही हैं। कई जगहों पर पानी की लाइनें सीवेज पाइप के बहुत करीब से गुजरती हैं। जंग लगी या टूटी हुई पाइपों से गंदा पानी पीने के पानी में मिल जाता है। गर्मी और बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। इस वजह से कई गांवों के लोग नल का पानी पीने से कतराते हैं। वे आरओ (RO) या टैंकर के पानी पर निर्भर रहते हैं, लेकिन यह हर परिवार के लिए मुमकिन नहीं है।
हरियाणा में टाइफाइड के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और रोहतक जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में पुरानी पाइपलाइनें नए इलाकों के बढ़ते दबाव को झेल नहीं पा रही हैं। कई जगहों पर पानी और सीवेज की लाइनें आपस में मिल गई हैं, जिसे क्रॉस-कनेक्शन की समस्या कहते हैं। यह सब मिलकर पीने के पानी को दूषित कर रहा है और लोगों को बीमार बना रहा है।

यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि साफ पानी हर किसी का अधिकार है। सरकार को इस समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और पानी सप्लाई की व्यवस्था को सुधारना चाहिए। पुरानी पाइपलाइनों को बदलना और सीवेज तथा पानी की लाइनों को अलग रखना बहुत जरूरी है। ताकि हरियाणा के लोग सुरक्षित और साफ पानी पी सकें।

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