Varsha vasant Themed Kathak Workshop Special Event In Memory Of Pandit Birju Maharaj
'वर्षा-वसंत' के भावों से सजी कथक कार्यशाला
नवभारत टाइम्स•
लखनऊ में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में कथक की पांच दिवसीय मास्टर क्लास शुरू हुई है। यह कार्यशाला पंडित बिरजू महाराज की स्मृति में आयोजित है। इसमें विद्यार्थी 'वर्षा-वसंत' की प्रस्तुति पर कोरियोग्राफी सीख रहे हैं। गुरु पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य ताल और भाव के संतुलन पर जोर दे रहे हैं।
लखनऊ: भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज की याद में शुरू की गई पीठ के तहत पांच दिवसीय कथक मास्टर क्लास का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बुधवार को शुरू हुई और कथक गुरु पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य के मार्गदर्शन में चल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ' वर्षा-वसंत ' नामक प्रस्तुति पर ध्यान केंद्रित करना है, जहाँ विद्यार्थियों को कोरियोग्राफी के खास तरीके सिखाए जा रहे हैं।
पंडित असीम बंधु ने इस कार्यशाला में 'ताल पक्ष' और 'भाव पक्ष' के बीच संतुलन बनाने पर बहुत जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को वसंत ऋतु की भावनाओं को दर्शाने वाली एक बहुत पुरानी और मशहूर बंदिश 'केतकी गुलाब जूही, चंपक बन फूले' पर कथक के भाव सिखाए। इसके साथ ही, उन्होंने शुद्ध नृत्य के तहत आमद, टुकड़े, तोड़े, परन और तिहाई का भी गहराई से अभ्यास कराया। उन्होंने समझाया कि कैसे पैरों के संचालन और हाथों के इशारों से ऋतुओं की सुंदरता को मंच पर दिखाया जा सकता है। आरिफ खान ने हारमोनियम पर और विकास मिश्रा ने तबले पर संगत दी, जिससे कार्यशाला का माहौल संगीतमय और सीखने लायक बन गया।इस कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ गुरु पंडित राम मोहन महाराज, कार्यक्रम संयोजक और विभागाध्यक्ष (नृत्य) ज्ञानेंद्र दत्त बाजपेयी, डॉ. मंजुला पंत और डॉ. रुचि खरे भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने अपने संदेश में कहा कि कथक भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को व्यक्त करने का एक जरिया है। वहीं, कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन ने बताया कि यह पांच दिन की कार्यशाला 14 फरवरी को एक खास प्रस्तुति के साथ खत्म होगी। इसमें विद्यार्थी वही सब दिखाएंगे जो उन्होंने इस कार्यशाला में सीखा है।
यह मास्टर क्लास विद्यार्थियों को कथक के तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ उसकी भावनात्मक गहराई को समझने में मदद कर रही है। 'वर्षा-वसंत' जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से, छात्र प्रकृति के विभिन्न रूपों और भावनाओं को नृत्य के माध्यम से व्यक्त करना सीख रहे हैं। यह कार्यशाला न केवल कथक के पारंपरिक तत्वों को मजबूत करती है, बल्कि समकालीन प्रस्तुतियों के लिए भी नए रास्ते खोलती है। पंडित असीम बंधु का अनुभव और मार्गदर्शन विद्यार्थियों के लिए अमूल्य साबित हो रहा है।