स्टॉल पर लगे सेल के बोर्ड

नवभारत टाइम्स

सूरजकुंड मेला अपने अंतिम पड़ाव पर है। रविवार को इसका आखिरी दिन होगा। शुक्रवार को ही करीब दो लाख लोग मेले में पहुंचे। अंतिम सप्ताहांत पर भीड़ और बढ़ने की संभावना है। मिस्र की शिल्पकला पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही है। बच्चों के लिए स्वदेशी खिलौने और ज्ञानवर्धक पुस्तकें भी खास आकर्षण का केंद्र हैं।

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सूरजकुंड मेले का अंतिम दिन रविवार को है, और वीकेंड पर भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। शुक्रवार को ही करीब दो लाख लोग मेले में पहुंचे, जहाँ बच्चों के लिए स्वदेशी खिलौने और ज्ञानवर्धक किताबें आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। वहीं, पार्टनर कंट्री मिस्र की पारंपरिक शिल्पकला, जिसमें कालीन, पेंटिंग और आभूषण शामिल हैं, पर्यटकों को खूब भा रही है।

सूरजकुंड मेले का समापन रविवार को होने वाला है, और अंतिम वीकेंड पर लोगों की भीड़ और बढ़ने की संभावना है। शुक्रवार को ही मेले में लगभग दो लाख लोग पहुंचे, जिससे मेले के रास्ते और स्टॉल लोगों से भरे नजर आए। मेला प्रबंधन को उम्मीद है कि अंतिम सप्ताहांत में यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
बच्चों के लिए मेले में खास आकर्षण स्वदेशी खिलौने हैं। ये खिलौने सुरक्षित और प्राकृतिक सामग्री से बने हैं, जिन्हें अभिभावक भी खूब पसंद कर रहे हैं। पारंपरिक गुड्डे-गुड़िया, लकड़ी की गाड़ियां, हाथ से बने पशु-पक्षियों के मॉडल और शैक्षिक बोर्ड गेम्स की काफी मांग देखी जा रही है। कई स्टॉल पर पर्यावरण के अनुकूल खिलौने भी उपलब्ध हैं। खिलौनों के साथ-साथ, बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक पुस्तकें भी मेले में खूब बिक रही हैं। कहानियों, लोक कथाओं और सामान्य ज्ञान की किताबों में अभिभावक विशेष रुचि दिखा रहे हैं।

इस बार मेले में पार्टनर कंट्री मिस्र की शिल्पकला पर्यटकों को बहुत आकर्षित कर रही है। मिस्र के कारीगरों द्वारा बनाए गए हाथ से बुने कालीन, सुंदर पेंटिंग, धातु पर की गई नक्काशी, कांच के शिल्प और पारंपरिक आभूषण लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। मिस्र के शिल्पकारों ने अपनी पुरानी सभ्यता की झलक इन शिल्पों के माध्यम से दिखाई है, जिससे मेले की अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी मजबूत हुई है। मिस्र के अलावा, सूडान, जॉर्डन, थाईलैंड, ट्यूनीशिया और कजाकिस्तान जैसे कई अन्य देशों की शिल्पकला भी पर्यटकों को लुभा रही है।