Bulldozer Runs Over Illegal Road Construction In Aravalli Forest Department Removes Encroachment
अरावली एरिया में कब्ज़ा कर बनाई थी सड़क, हुआ एक्शन
नवभारत टाइम्स•
गुड़गांव के अरावली क्षेत्र में अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। कुछ लोगों ने दमदमा झील के पास जमीन पर कब्जा कर पेड़ काटकर सड़क बना दी थी। वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया और सड़क को भी उखाड़ दिया। बिजली के पोल भी तोड़े गए।
गुड़गांव में अरावली के संरक्षित इलाकों में अतिक्रमण का मामला सामने आया है। दमदमा झील के पास कुछ लोगों ने न केवल जमीन पर कब्जा किया बल्कि पेड़ काटकर सड़क भी बना दी और बिजली के पोल लगा दिए। वन विभाग की टीम ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया और अवैध निर्माण को तोड़ दिया। यह घटना तब हुई जब वन विभाग को शुक्रवार को शिकायत मिली थी कि दमदमा झील के आसपास जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।
वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को शिकायत मिलने के बाद इलाके का निरीक्षण किया और सोमवार को मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाया। उन्होंने अवैध निर्माण को तोड़ दिया और समतल की गई सड़क को भी उखाड़ दिया। जानकारी के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने जमीन को समतल किया, पेड़ काटे और नए निर्माण के लिए सड़क भी बना दी। यह सड़क संरक्षित वन क्षेत्र से होकर निकाली गई थी और नई संरचनाओं तक बिजली की लाइनें भी पहुंचाई गई थीं। झाड़ीदार जंगल को समतल कर घेराबंदी की गई थी और तार फेंसिंग से जगह को कवर किया गया था। वहां एक अस्थायी छत वाला ढांचा और बिजली के खंभे भी मिले।आसपास के लोगों ने इस अवैध कब्जे की शिकायत वन विभाग से की थी। सोमवार को विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बिजली के पोल तोड़े और जेसीबी की मदद से समतल जमीन पर गड्ढे बनाए। यह सड़क हरियाणा पर्यटन विभाग के दमदमा टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स के पीछे से निकलकर झील तक जाती है। इस तरह के अतिक्रमण से अरावली के प्राकृतिक सौंदर्य पर लगातार खतरा मंडरा रहा है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि अरावली क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। दमदमा झील एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है और यहां अतिक्रमण करके पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अरावली पहाड़ी में किसी भी तरह के निर्माण कार्य की इजाजत नहीं है। इसके बावजूद, NGT के आदेशों को नजरअंदाज कर अवैध निर्माण किए गए हैं। हाल ही में, वन विभाग की टीम ने इस इलाके में हुए अवैध निर्माणों का सर्वे भी किया था।
इस मामले पर रेंज ऑफिसर संजय यादव ने बताया कि अतिक्रमण हटा दिया गया है और मामले की जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे कुछ लोग अपने निजी फायदे के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आते, जबकि कई सामाजिक संस्थान और संगठन अरावली के संरक्षण के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
अरावली का संरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि यह क्षेत्र न केवल प्राकृतिक सुंदरता का भंडार है, बल्कि यह दिल्ली-एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण फेफड़े का काम भी करता है। यहां के पेड़-पौधे प्रदूषण को कम करने और भूजल स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। दमदमा झील जैसे क्षेत्र न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। ऐसे में, इन क्षेत्रों में होने वाला अवैध निर्माण न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए भी हानिकारक है। वन विभाग की कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है, लेकिन भविष्य में ऐसे अतिक्रमणों को रोकने के लिए और अधिक सख्त निगरानी और निवारक उपायों की आवश्यकता है। NGT के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करना इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।