Master Trainers Will Now Observe Classroom Learning Initiative To Improve Teaching Standards
क्लास में मास्टर ट्रेनर्स देखेंगे, कैसे हो रही है पढ़ाई
नवभारत टाइम्स•
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारा जाएगा। मास्टर ट्रेनर्स कक्षाओं में जाकर शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और बच्चों की सक्रियता को परखेंगे। 29 अलग-अलग व्यवहारों के आधार पर मूल्यांकन होगा। इससे पता चलेगा कि किस स्कूल में सुधार की जरूरत है। यह पहल एससीईआरटी द्वारा की जा रही है।
गुड़गांव के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का तरीका परखा जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने यह पहल शुरू की है। मास्टर ट्रेनर्स स्कूलों में जाकर कक्षाओं में बैठेंगे और 29 अलग-अलग व्यवहारों के आधार पर पढ़ाई के माहौल, शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और बच्चों की सक्रियता को जांचेंगे। इसका मकसद स्कूलों में शिक्षण प्रक्रिया को और बेहतर बनाना है।
इस नई व्यवस्था के तहत, मास्टर ट्रेनर्स स्कूलों में सिर्फ औपचारिकता के लिए नहीं जाएंगे। वे बच्चों के साथ कक्षा में बैठकर पढ़ाई की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझेंगे। वे देखेंगे कि शिक्षक कैसे पढ़ा रहे हैं, बच्चे कितनी भागीदारी दिखा रहे हैं, सवाल पूछ रहे हैं या नहीं, कक्षा में अनुशासन कैसा है, पढ़ाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल हो रहा है और बच्चों को कितना समझ आ रहा है। यह भी देखा जाएगा कि बच्चे शिक्षक से कितना बात कर पा रहे हैं और क्या क्लास में एक्टिविटी करके सिखाया जा रहा है।निरीक्षण के बाद, हर कक्षा को तय मानकों के हिसाब से एक रैंक दी जाएगी। इससे यह पता चलेगा कि किस स्कूल में पढ़ाई का स्तर अच्छा है और कहां सुधार की जरूरत है। इस योजना के पहले चरण में मास्टर ट्रेनर्स को खास ट्रेनिंग दी गई है ताकि वे इस काम को अच्छे से कर सकें।
मास्टर ट्रेनर्स शिक्षकों की पढ़ाने की शैली, बच्चों की क्लास में भागीदारी, उनके सवाल पूछने की आदत, क्लास का माहौल, पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और बच्चों की समझ जैसी कई बातों पर ध्यान देंगे। वे यह भी देखेंगे कि बच्चे शिक्षक से कितना जुड़ पा रहे हैं और क्या क्लास में करके सीखने वाली पद्धति अपनाई जा रही है। बच्चों को विषय समझ आ रहा है या नहीं, या उन्हें कोई दिक्कत हो रही है, यह सब भी परखा जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता को बढ़ाना है। जब हर कक्षा का मूल्यांकन होगा, तो यह साफ हो जाएगा कि कौन से स्कूल अच्छा काम कर रहे हैं और किन स्कूलों को मदद की जरूरत है। इससे शिक्षा विभाग को उन स्कूलों पर ध्यान केंद्रित करने में आसानी होगी जिन्हें सुधार की आवश्यकता है। यह कदम बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।