सोनम वांगचुक का अनशन: शिक्षा सुधार पर सांसदों से भरोसे की मांग, 20 जुलाई को खत्म करने की शर्त
सोनम वांगचुक का अनशन: शिक्षा सुधार पर सांसदों से भरोसे की मांग, 20 जुलाई को खत्म करने की शर्त
NewsPoint•
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर संसद के मानसून सत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार का मुद्दा उठाने का वादा करते हैं, तो वे अपना अनशन तोड़ देंगे। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। वांगचुक ने कहा कि वे 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर देंगे, बशर्ते सरकार शिक्षा में हाल की नाकामियों, जैसे पेपर लीक, की जिम्मेदारी ले। या फिर, वे और सीजेपी (चिल्ड्रन फॉर चेंज) के नेता संसद पहुंचें और वहां सांसद व राजनीतिक दल उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। अगर उनकी सेहत या किसी अन्य कारण से यह संभव नहीं हो पाता है, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता अस्पताल आकर उन्हें यह आश्वासन दें। वांगचुक ने यह भी दावा किया कि यह संदेश उन्होंने 19 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में अपनी "गैरकानूनी नजरबंदी" के दौरान लिखा, जहां उनकी घूमने-फिरने, बोलने और लोगों से बातचीत करने की आजादी पर रोक लगी हुई है। इससे पहले शनिवार देर रात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा था कि अगर विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल आकर वांगचुक को यह आश्वासन देते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी वह अपना अनशन समाप्त करेंगे।
सोनम वांगचुक, जो लद्दाख के एक जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका अनशन तभी खत्म होगा जब उन्हें राजनीतिक दलों से ठोस आश्वासन मिलेगा। यह आश्वासन संसद में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने के रूप में होगा। वांगचुक ने अपनी बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए लोगों तक पहुंचाई। उन्होंने लिखा, "मैं अपना व्रत कब तोड़ूंगा…?"उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि वे कब अपना अनशन खत्म करेंगे। वांगचुक ने कहा, "प्रिय दोस्तों और समर्थकों, आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब खत्म करूंगा। जैसा कि मैंने पहले समर्थकों को बताया था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दूंगा, अगर Government शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों (जैसे पेपर लीक वगैरह) की जिम्मेदारी ले या मैं और सीजेपी का नेतृत्व संसद पहुंचें तथा वहां सांसद और विभिन्न Political दलों के नेता हमें यह भरोसा दिलाएं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।"
वांगचुक ने यह भी कहा कि अगर उनकी सेहत खराब होती है या किसी और वजह से वे खुद संसद नहीं पहुंच पाते हैं, तो भी उनकी मांग वही रहेगी। उन्होंने कहा, "यदि मेरी सेहत या किसी अन्य कारण से ऐसा संभव नहीं हो पाता है, तो विभिन्न Political दलों के सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर यह भरोसा दें।" इसका मतलब है कि राजनीतिक नेताओं को उनसे मिलने अस्पताल आना होगा और उन्हें आश्वस्त करना होगा कि वे संसद में शिक्षा के मुद्दे को उठाएंगे।
वांगचुक ने अपनी पोस्ट में एक गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि यह संदेश उन्होंने 19 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में अपनी "गैरकानूनी नजरबंदी" के दौरान लिखा था। उनके अनुसार, अस्पताल में उनकी घूमने-फिरने, बोलने और लोगों से बातचीत करने की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई थी। यह स्थिति उनके अनशन के महत्व को और बढ़ा देती है, क्योंकि वे अपनी बात रखने के लिए भी स्वतंत्र नहीं थे।
वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे. आंगमो, ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने शनिवार देर रात कहा था कि वांगचुक का अनशन तभी समाप्त होगा जब विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल आकर उन्हें यह आश्वासन देंगे कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, "सोनम अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब Political दलों के नेता अस्पताल में उनसे मिलकर यह आश्वासन देंगे कि वे संसद सत्र के दौरान शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे।" यह स्पष्ट करता है कि वांगचुक और उनके परिवार के लिए यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है और वे इसे लेकर कितने गंभीर हैं।