गर्मी और मॉनसून में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ा: विशेषज्ञ की चेतावनी, ऐसे करें बचाव

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गर्मी और आने वाले मॉनसून के मौसम में जलजनित और खाद्यजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों ने हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के प्रति आगाह किया है। दूषित पानी और खुले में बिकने वाले भोजन से संक्रमण फैल सकता है।

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देश के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ रही है और जल्द ही मॉनसून आने वाला है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जलजनित और खाद्यजनित बीमारियों को लेकर खास चेतावनी जारी की है। एम्स दिल्ली के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल बताते हैं कि इस मौसम में हैजा (कॉलेरा), टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-ई और अमीबायसिस जैसी बीमारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। बारिश के मौसम में पानी के स्रोत गंदे हो जाते हैं और खुले में बिकने वाला खाना खाने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार लोग पेट खराब होने या वायरल संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो सकती है।

डॉ. नीरज निश्चल के अनुसार, इन बीमारियों के आम लक्षणों में बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) शामिल हैं। हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई में पीलिया, भूख न लगना और बहुत ज्यादा थकान जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। साथ ही, ताजा और साफ खाना खाएं और अपने हाथों को हमेशा साफ रखें। खुले में बिकने वाले कटे फल, बासी खाना और खराब गुणवत्ता वाले पेय पदार्थों से दूर रहने की भी अपील की गई है।

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। अगर लगातार बुखार, दस्त या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है।

बारिश के मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत अहम है। गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों से बचने के लिए पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें। बाहर का खाना खाते समय उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता का ध्यान रखें।

हेपेटाइटिस-ए और ई जैसी बीमारियां भी इस मौसम में ज्यादा फैलती हैं। ये बीमारियां दूषित पानी या खाने से होती हैं। इनके लक्षणों में पीलिया (आंखें और त्वचा पीली पड़ना), भूख कम लगना और बहुत ज्यादा थकावट महसूस होना शामिल है।

बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अक्सर कमजोर होती है, इसलिए उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में उनकी विशेष देखभाल करना और उन्हें साफ-सुथरा माहौल देना जरूरी है।

अगर किसी को भी लगातार बुखार, दस्त या पेट से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर की सलाह लें ताकि बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके और सही इलाज मिल सके।

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