मणिपुर में स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां घटीं, सीएम ने बताई वजह

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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश को तीन सप्ताह से घटाकर एक सप्ताह करने की घोषणा की है। यह फैसला छात्रों की पढ़ाई में आने वाली रुकावट को कम करने और शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखने के उद्देश्य से लिया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 7 अप्रैल को थोंगलाओबी गांव में हुई एक दुखद घटना के बाद लगभग एक महीने तक स्कूल और सरकारी दफ्तरों का काम प्रभावित रहा, जिसके चलते पिछले शनिवार को सभी सरकारी विभागों के लिए कार्य दिवस घोषित किया गया था ताकि रुके हुए काम पूरे हो सकें। लंबित कार्य पूरे होने के बाद शनिवार को फिर से अवकाश घोषित किया जाएगा।

यह महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 'मणिपुर की स्कूल शिक्षा में सुधार: एनईपी-2020 के कार्यान्वयन, चुनौतियां और अवसर' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में लिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा दुनिया को बदलने का सबसे शक्तिशाली साधन है, जैसा कि नेल्सन मंडेला ने कहा था। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी-2020) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि कक्षा 5 तक मातृभाषा में शिक्षा देने से बच्चों की सीखने की क्षमता बेहतर होती है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एनईपी-2020 को सफल बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की है। उन्होंने कहा कि सरकार, कर्मचारी और जनता मिलकर ही इस नीति को सफल बना सकते हैं। इस कार्यशाला में मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और एनईपी-2020 इसमें अहम भूमिका निभा रही है।

विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र के अध्यक्ष प्रोफेसर गंगा प्रसाद प्रसैन ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कक्षा 6 से छात्रों को कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए। इसका उद्देश्य छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे भविष्य में अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

यह घटना 7 अप्रैल को बिश्नुपुर जिले के थोंगलाओबी गांव में हुई थी। इस दर्दनाक हादसे में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने एक घर पर बम फेंका था। इस हमले में एक 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई थी, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। यह घटना तब हुई जब पूरा परिवार सो रहा था। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे 7 अप्रैल की घटना के बाद लगभग एक महीने तक शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी दफ्तरों का सामान्य कामकाज प्रभावित रहा। इसी वजह से, उन्होंने शनिवार को सभी सरकारी विभागों के लिए कार्य दिवस घोषित किया था। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि जो काम रुक गए थे, वे पूरे हो सकें। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही यह लंबित कार्य पूरा हो जाएगा, शनिवार को फिर से अवकाश घोषित कर दिया जाएगा।

एनईपी-2020 के बारे में बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया, खासकर कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए। उनका मानना है कि इससे बच्चों की सीखने की प्रक्रिया आसान और प्रभावी बनती है।

मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने भी एनईपी-2020 के महत्व को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को स्वतंत्रता के 100 साल पूरे होने तक एक विकसित देश बनाने के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रोफेसर गंगा प्रसाद प्रसैन का सुझाव भी काफी अहम है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान भी मिलना चाहिए। कक्षा 6 से ही उन्हें ऐसे कौशल सिखाए जाने चाहिए जो उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बना सकें। यह व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से संभव है।

कुल मिलाकर, मणिपुर सरकार शिक्षा को बेहतर बनाने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई कदम उठा रही है। ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती और एनईपी-2020 का कार्यान्वयन इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।

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