ईरान-अमेरिका युद्धविराम समझौता: अमेरिका की अड़चनें, फ्रीज संपत्ति पर विवाद

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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता ज्ञापन पर बातचीत जारी है। अमेरिका एमओयू की कुछ अहम शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है, जिससे यह रद्द भी हो सकता है। ईरान अपनी संपत्तियों की रिहाई और समुद्री नाकेबंदी रोकने की मांग पर अड़ा है।

Navbharat Times
तेहरान, 25 मई (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक संभावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर बातचीत अटकी हुई है। अमेरिका एमओयू की कुछ अहम शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है, जिसमें ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना भी शामिल है। इस वजह से एमओयू रद्द होने की भी संभावना है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगा।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने सरकारी चैनल आईआरआईबी टीवी से बात करते हुए बताया था कि ईरान और अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए एक एमओयू को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस समय हमारा मुख्य ध्यान इस थोपे गए युद्ध को खत्म करने पर है।” दोनों देशों की कोशिश पहले 14 बिंदुओं वाले एक एमओयू पर सहमति बनाने की है। बाघेई के मुताबिक, 30 से 60 दिनों के भीतर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक अंतिम समझौता हो सकता है।
इस एमओयू में जिन बड़े मुद्दों पर बात हो रही है, उनमें अमेरिका की समुद्री कार्रवाई या नौसैनिक नाकेबंदी को रोकना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना शामिल है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अपने रिपोर्टर के हवाले से बताया कि रविवार को दोनों पक्षों के बीच कुछ बातचीत हुई थी, लेकिन अमेरिका अब भी समझौते की कुछ अहम शर्तों में रुकावट डाल रहा है।

ईरान ने साफ कहा है कि वह अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े अपने 'रेड लाइन' मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगा। इसका मतलब है कि ईरान उन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा जो उसके नागरिकों के अधिकारों से जुड़े हैं।

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच आठ अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इससे पहले 40 दिनों तक लड़ाई चली थी। इस लड़ाई की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों से हुई थी। युद्धविराम के बाद, ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता की थी। लेकिन उस बातचीत में कोई समझौता नहीं हो पाया था।

इस एमओयू का मकसद ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करना और युद्ध को रोकना है। लेकिन अमेरिका की तरफ से कुछ शर्तों पर अड़ियल रवैया अपनाने से यह समझौता मुश्किल में पड़ गया है। ईरान अपनी संपत्तियों की वापसी को एक महत्वपूर्ण शर्त मान रहा है। अगर अमेरिका इस पर सहमत नहीं होता है, तो यह एमओयू रद्द हो सकता है। ईरान का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और नागरिकों के अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। यह स्थिति दोनों देशों के बीच भविष्य की बातचीत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

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