नूंह में नोटों की माला पर प्रशासन की सख्ती: आय का स्रोत बताना होगा अनिवार्य

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नूंह जिले में शादियों में नोटों की माला पहनकर दिखावा करने वालों पर प्रशासन ने सख्ती की है। अब हर नोट का हिसाब देना होगा। बिना वैध स्रोत बताए कार्रवाई होगी। पुलिस ऐसे मामलों पर नजर रखेगी। आय के स्रोत की जांच संभव है। प्रशासन ने लोगों से सादगी से शादी मनाने की अपील की है।

Navbharat Times
हरियाणा के नूंह जिले में अब शादियों में नोटों की मालाएं पहनकर दिखावा करने वालों पर प्रशासन का शिकंजा कस गया है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि ऐसी मालाओं में इस्तेमाल होने वाले हर नोट का हिसाब देना होगा, और बिना वैध स्रोत बताए ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होगी। यह कदम शादियों में बढ़ते दिखावे और काले धन की आशंका को देखते हुए उठाया गया है।

हाल के सालों में शादियों में नोटों की मालाएं पहनकर स्टेज पर पैसे उड़ाने का चलन काफी बढ़ गया है। कई बार इन मालाओं में हजारों और लाखों रुपये के नोट लगे होते हैं। इससे समाज में गलत संदेश जाता है और काले धन के इस्तेमाल की आशंका भी पैदा होती है। इसी चिंता को देखते हुए नूंह पुलिस ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है।
नूंह पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि अब शादी समारोहों में ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति नोटों की माला पहनता है या किसी को पहनाता है, तो उसे यह साबित करना होगा कि वह पैसा कहां से आया है और उसका स्रोत पूरी तरह से वैध है। पुलिस ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर कोई मामला संदिग्ध लगता है, तो उसकी जांच की जाएगी और उचित कार्रवाई भी की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी शादी में बहुत ज्यादा नकदी का इस्तेमाल होता है, तो इनकम टैक्स विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को भी इसकी जानकारी दी जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं कोई अवैध या बिना हिसाब-किताब वाला पैसा सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परंपराएं आजकल सामाजिक दबाव और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ का हिस्सा बन गई हैं। लोग अपनी शादी को बहुत भव्य दिखाने के चक्कर में बेवजह का खर्च करते हैं। इससे न केवल आर्थिक असमानता बढ़ती है, बल्कि कई बार कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी खड़ी हो जाती हैं।

प्रशासन ने लोगों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा है कि शादी जैसे पवित्र मौके को सादगी और जिम्मेदारी के साथ मनाना चाहिए। बेवजह का दिखावा और नोटों का प्रदर्शन करने से बचना चाहिए। ऐसा करके लोग किसी भी तरह की कानूनी मुश्किलों से बच सकते हैं। यह कदम समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश है, जहां शादियां सिर्फ खुशी मनाने का जरिया बनें, न कि दिखावे का मंच। इस तरह की पहल से न केवल फिजूलखर्ची रुकेगी, बल्कि समाज में एक बेहतर संदेश भी जाएगा। लोग अपनी मेहनत की कमाई का सदुपयोग करें और ऐसे आयोजनों को गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न कराएं।

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