बिहार में मत्स्य पालन: नेपाल और सीमावर्ती राज्यों तक पहुंचेगी मछली, उत्पादन बढ़ाने की बड़ी योजना

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बिहार सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा दे रही है। मछली उत्पादन बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य है। बिहार की मछली नेपाल और अन्य सीमावर्ती राज्यों के बाजारों तक पहुंचेगी। इससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

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बिहार सरकार राज्य में मछली पालन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि बिहार के मछुआरे सिर्फ राज्य के बाजारों तक ही सीमित न रहें, बल्कि उनकी मछली नेपाल और दूसरे सीमावर्ती राज्यों के बाजारों तक भी आसानी से पहुंचे। इस योजना से राज्य के मछली उत्पादकों को बड़ा आर्थिक फायदा होने की उम्मीद है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मछली उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में हर साल करीब नौ लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है, जिसे बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष करने का सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने अधिकारियों को इस लक्ष्य को पाने के लिए एक पक्की योजना बनाने और उसे ठीक से लागू करने का आदेश दिया है। सरकार का मानना है कि अगर मछली उत्पादन इतना बढ़ जाता है तो इससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि गांवों में लोगों के लिए रोजगार के नए मौके भी खुलेंगे। खासकर छोटे और मध्यम स्तर के मछुआरों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार में पानी के संसाधन काफी हैं, जिनका सही इस्तेमाल करके राज्य मछली उत्पादन में अव्वल बन सकता है। इसके लिए नई तकनीकों, अच्छी क्वालिटी के बीज, वैज्ञानिक तरीके से मछली पालने और बेचने की व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार यह भी पक्का करेगी कि बिहार की मछली गुणवत्ता के मामले में अच्छी हो, ताकि इसे देश और विदेश के बाजारों में दूसरे उत्पादों से मुकाबला करने लायक बनाया जा सके। नेपाल और दूसरे सीमावर्ती राज्यों में बिहार की मछली की मांग बढ़ाने के लिए सामान पहुंचाने की व्यवस्था और कोल्ड स्टोरेज (ठंडा रखने की जगह) को भी मजबूत करने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह लक्ष्य पूरा हो जाता है तो बिहार देश के बड़े मछली उत्पादक राज्यों में शामिल हो जाएगा। इससे राज्य के आर्थिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी। सरकार की इस पहल से मछली पालन के क्षेत्र में एक नए दौर की शुरुआत होने की उम्मीद है, जिससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर अच्छा असर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को साफ कहा है कि बिहार के मछुआरे सिर्फ अपने राज्य में ही मछली न बेचें, बल्कि उनकी पहुंच नेपाल और दूसरे पड़ोसी राज्यों के बाजारों तक भी होनी चाहिए। यह एक बहुत बड़ा कदम है जिससे राज्य के मछली पालने वाले किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस बात पर जोर दिया कि मछली उत्पादन को बढ़ाना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि फिलहाल बिहार में हर साल लगभग नौ लाख मीट्रिक टन मछली पैदा होती है। सरकार का लक्ष्य है कि इसे बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाया जाए। इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने अधिकारियों को एक ठोस रणनीति बनाने और योजनाओं को सही ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का मानना है कि मछली उत्पादन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा छोटे और मध्यम स्तर के मछली पालने वाले किसानों को होगा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार में पानी के स्रोत काफी हैं। अगर इनका सही इस्तेमाल किया जाए तो बिहार मछली उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है। इसके लिए सरकार आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने, अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने, वैज्ञानिक तरीके से मछली पालने और बेचने की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है।

इसके अलावा, सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि बिहार में पैदा होने वाली मछली गुणवत्ता के मामले में अव्वल हो। इससे बिहार की मछली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दूसरे उत्पादों से मुकाबला करने में आसानी होगी। नेपाल और दूसरे सीमावर्ती राज्यों में बिहार की मछली की मांग बढ़ाने के लिए, सामान को जल्दी पहुंचाने की व्यवस्था (सप्लाई चेन) और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा। कोल्ड स्टोरेज का मतलब है ऐसी जगहें जहाँ मछली को खराब होने से बचाने के लिए ठंडा रखा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार अपने इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लेती है, तो बिहार देश के प्रमुख मछली उत्पादक राज्यों में गिना जाएगा। इससे राज्य के आर्थिक विकास को भी एक नई दिशा मिलेगी। सरकार की इस पहल से मछली पालन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है। इस बदलाव से हजारों लोगों की आजीविका पर सकारात्मक असर पड़ेगा और उनका जीवन बेहतर होगा।

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