2026 का वलयाकार सूर्य ग्रहण: कब, कहाँ और कैसे देखें 'आग का छल्ला'

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साल 2026 में एक खास खगोलीय घटना होने वाली है। 12 अगस्त को एक वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा। इस दौरान सूरज आग के छल्ले जैसा दिखाई देगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा। यह ग्रहण यूरोप, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और रूस के कुछ हिस्सों में दिखेगा।

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2026 में, 12 अगस्त की रात 9:04 बजे से शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक एक अद्भुत खगोलीय नज़ारा देखने को मिलेगा। यह साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण होगा, जो एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। इस खास ग्रहण में चंद्रमा सूरज को पूरी तरह से नहीं ढकेगा, बल्कि सूरज का बाहरी किनारा एक चमकते हुए छल्ले की तरह दिखाई देगा, जिसे "आग का छल्ला" (Ring of Fire) भी कहा जाता है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा। हालांकि, यूरोप, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन, आर्कटिक क्षेत्र और रूस के कुछ हिस्सों में लोग इस शानदार नज़ारे का दीदार कर पाएंगे।

यह वलयाकार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को रात 9:04 बजे शुरू होगा और अगले दिन, 13 अगस्त को सुबह 4:25 बजे तक चलेगा। खगोलविदों का अनुमान है कि ग्रहण का सबसे खास हिस्सा, यानी जब सूरज आग के छल्ले जैसा दिखेगा, करीब 6 मिनट और 23 सेकंड तक रहेगा। यह काफी लंबी अवधि है, इसलिए इसे एक खास ग्रहण माना जा रहा है।
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूरज के बीच आ जाता है। इस दौरान, चंद्रमा कुछ देर के लिए सूरज की रोशनी को रोक देता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण में, चंद्रमा सूरज को पूरी तरह से नहीं ढक पाता। सूरज का कुछ हिस्सा बाहर दिखाई देता रहता है, जो एक खूबसूरत छल्ले जैसा लगता है। इसी वजह से इसे "आग का छल्ला" (Ring of Fire) भी कहते हैं।

यह जानना ज़रूरी है कि 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसका मतलब है कि भारत में इससे जुड़ा कोई भी सूतक काल लागू नहीं होगा। सूतक काल एक पारंपरिक समय होता है जब कुछ धार्मिक पाबंदियां मानी जाती हैं। चूंकि ग्रहण यहां दिखेगा ही नहीं, इसलिए लोगों को पूजा-पाठ, खाना बनाने या किसी भी रोज़मर्रा के काम को लेकर चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। हालांकि, जो लोग खगोल विज्ञान में रुचि रखते हैं, वे इस घटना को ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम के ज़रिए ज़रूर देख सकते हैं।

यह वलयाकार सूर्य ग्रहण यूरोप के कई देशों में साफ दिखाई देगा। इसके अलावा, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन के उत्तरी हिस्से, आर्कटिक क्षेत्र और रूस के कुछ हिस्सों में रहने वाले लोग भी इस अद्भुत खगोलीय घटना के गवाह बन पाएंगे। इन जगहों पर लोग आसमान में "आग के छल्ले" का एक शानदार नज़ारा देखने की उम्मीद कर रहे हैं। यह वाकई एक यादगार पल होगा उन सभी के लिए जो इसे अपनी आंखों से देख पाएंगे।

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