NIFTY 50: 24000 पार करने की चुनौती, बाजार में कंसोलिडेशन जारी, जानें सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

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भारतीय शेयर बाजार में निफ्टी 50 महत्वपूर्ण स्तरों पर है। 24,000 का स्तर पार करना लंबी अवधि की तेजी के लिए आवश्यक है। 23,800 का स्तर सपोर्ट का काम कर रहा है। इस स्तर के टूटने पर बिकवाली बढ़ सकती है। ट्रेडर्स को सतर्क रहने और स्टॉप लॉस का ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

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भारतीय शेयर बाजार में NIFTY 50 फिलहाल एक अहम मोड़ पर खड़ा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी को लंबी अवधि की तेजी के लिए 24,000 के स्तर को फिर से हासिल करना होगा और उस पर मजबूती से टिकना होगा। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक बाजार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव यानी कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। फिलहाल 23,800 का स्तर निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तो बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर 23,800 का सपोर्ट टूटता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और शेयर बाजार नीचे जा सकता है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 23,700 से 23,600 का इलाका अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। अगर बाजार में कमजोरी बढ़ती है, तो निफ्टी इन स्तरों तक गिर सकता है। वहीं, अगर निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूती से बंद होता है, तो यह बाजार में नई तेजी का संकेत दे सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि फिलहाल ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए। छोटी अवधि के कारोबार में सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर नजर रखना बहुत जरूरी है।
बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल संकेत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और घरेलू आर्थिक आंकड़े भी अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकता है, तो बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, अगर सपोर्ट टूटता है, तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार के जानकार निवेशकों को बिना सोचे-समझे बड़े दांव लगाने से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा बाजार में काफी उतार-चढ़ाव है, इसलिए स्टॉप लॉस (नुकसान रोकने का स्तर) और रिस्क मैनेजमेंट (जोखिम प्रबंधन) बहुत जरूरी हो गया है।

फिलहाल, बाजार की नजरें निफ्टी के 24,000 और 23,800 जैसे अहम स्तरों पर टिकी हुई हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह साफ हो जाएगा कि बाजार नई तेजी की ओर बढ़ेगा या फिर दबाव के चलते निचले स्तरों की तरफ फिसलेगा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी को लंबी अवधि की तेजी पकड़ने के लिए 24,000 के स्तर को दोबारा हासिल करना होगा और उसके ऊपर मजबूती से टिके रहना जरूरी है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक बाजार में कंसोलिडेशन यानी सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में 23,800 का स्तर निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट का काम कर रहा है। यदि इंडेक्स इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि यदि 23,800 का सपोर्ट टूटता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बेयर्स इंडेक्स को नीचे की ओर धकेल सकते हैं। तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक 23,700 से 23,600 का जोन अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र माना जा रहा है। यदि बाजार में कमजोरी बढ़ती है तो निफ्टी इन स्तरों तक फिसल सकता है।

वहीं दूसरी ओर 24,000 के ऊपर मजबूती से क्लोजिंग मिलने पर बाजार में नई तेजी का संकेत मिल सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल ट्रेडर्स को सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। बाजार में ग्लोबल संकेत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और घरेलू आर्थिक आंकड़े भी निफ्टी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकता है तो बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं सपोर्ट टूटने की स्थिति में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार जानकार निवेशकों को बिना रणनीति के बड़े दांव लगाने से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक है, इसलिए स्टॉप लॉस और रिस्क मैनेजमेंट बेहद जरूरी हो गया है। फिलहाल बाजार की नजर निफ्टी के 24,000 और 23,800 जैसे अहम स्तरों पर टिकी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह साफ होगा कि बाजार नई तेजी की ओर बढ़ेगा या फिर दबाव के चलते निचले स्तरों की तरफ फिसलेगा।

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