मालेगांव मोसम नदी में खून का बहाव: बकरी ईद के बाद बढ़ा जल प्रदूषण, प्रशासन अलर्ट
मालेगांव मोसम नदी में खून का बहाव: बकरी ईद के बाद बढ़ा जल प्रदूषण, प्रशासन अलर्ट
NewsPoint•
मालेगांव में बकरी ईद के बाद मोसम नदी का पानी खून से सना मिला। स्थानीय लोगों ने कुर्बानी के बाद कचरा नदी में फेंकने का आरोप लगाया। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया है। तीन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
मालेगांव में बकरी ईद के बाद मोसम नदी का पानी खून से लाल बहने की खबर से हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुर्बानी के बाद जानवरों के खून और कचरे को नदी में बहा दिया गया, जिससे यह भयानक मंजर देखने को मिला। इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस हाई अलर्ट पर हैं। हर साल बकरी ईद पर ऐसी शिकायतें आती हैं, और इस बार भी प्रशासन ने नदी या सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी के अवशेष न फेंकने के सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन लगता है कि इन आदेशों का पालन नहीं हुआ।
मालेगांव के मोसम नदी में बकरी ईद के बाद खून से सना पानी बहने की घटनाओं ने इलाके में तनाव का माहौल बना दिया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक कुर्बानी के बाद जानवरों के खून और अन्य कचरे को सीधे नदी में फेंक दिया गया, जिसके कारण नदी का पानी लाल हो गया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि हर साल बकरी ईद के दौरान मोसम नदी में खून से सना पानी बहने की शिकायतें मिलती रही हैं। इस बार भी प्रशासन ने पहले ही साफ निर्देश जारी किए थे कि कुर्बानी के अवशेष और खून नदी या सार्वजनिक जगहों पर न फेंका जाए। हालांकि, आरोप है कि इन आदेशों का पालन नहीं किया गया।इलाके में पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। हालात की गंभीरता को समझते हुए, पुलिस अधिकारियों और जवानों की एक बड़ी टुकड़ी को मालेगांव में तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस लगातार इलाके में गश्त कर रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
अवैध कटान के आरोपों के बीच यह विवाद और गहरा गया है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जानवरों के अवैध कटान ने मोसम नदी में खून से सने पानी के बहाव की समस्या को और बढ़ा दिया है। इस बात का विरोध करते हुए कई सामाजिक संगठनों ने अपना गुस्सा जाहिर किया है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मालेगांव नगर आयुक्त, उपायुक्त और अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। उनका तर्क है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हर साल ऐसी स्थितियां दोहराई जाती हैं, जिसका लोगों की धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण, दोनों पर बुरा असर पड़ता है।
इस मामले में शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें एक वार्ड अधिकारी, एक स्वास्थ्य अधिकारी और एक नगर अभियंता शामिल हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों का मानना है कि केवल विभागीय कार्रवाई ही काफी नहीं है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं। यह मामला पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय है।