केरल पुलिस ने चेरानेल्लूर मर्सिडीज-बेंज दुर्घटना में जज के बेटे के खिलाफ नया आरोप जोड़ा

NewsPoint•
Navbharat Times
केरल पुलिस ने चेरानेल्लूर में हुई मर्सिडीज-बेंज दुर्घटना के मामले में एक जज के खिलाफ नया आरोप लगाया है। जज के 17 वर्षीय बेटे ने एक स्कूटर सवार को टक्कर मारी थी, जिससे उसकी मौत हो गई। अब पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 जोड़ी है, जो अपराध के सबूतों को मिटाने से संबंधित है। यह आरोप तब सामने आया जब मृतक जयाबालकृष्णन के परिवार ने कहा कि घटना के बाद सबूत खत्म किए जाने की कोशिश की गई थी। इस मामले की जांच कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर आर. निशांतिनी के निर्देश पर अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

इस मामले की वारदात एक कॉलोनी के कंटेनर रोड पर हुई थी। यहाँ एक मर्सिडीज-बेंज कार ने स्कूटर को टक्कर मारी, जिससे जयाबालकृष्णन की जान चली गई। कार को जज का बेटा चला रहा था। न्यायालय ने कहा है कि आगे की कार्यवाही 'इन-कैमरा' यानी बंद कमरे में होगी। इसका कारण है मामले की संवेदनशीलता और सबूतों की सुरक्षा।
पीड़ित परिवार और अभियोजन पक्ष के बीच कुछ मतभेद भी उत्पन्न हुए हैं। परिवार ने सरकारी वकील में कमी का आरोप लगाया है और उसे हटाने की मांग की है। दूसरी तरफ, अभियोजन पक्ष ने कहा है कि परिवार जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अदालत ने परिवार को चेताया है कि सरकारी वकील के खिलाफ कोई भी शिकायत उचित प्रक्रिया से ही प्रस्तुत की जानी चाहिए।

इस घटना के बाद कई हाई-प्रोफाइल लोग पीड़ित के घर आए। इनमें मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला शामिल हैं। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जिसके बाद क्राइम ब्रांच अब इस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

पुलिस के अनुसार, मामले में जितने भी सबूत जुटाए गए हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस स्थिति में, पुलिस की कोशिश है कि सभी तथ्यों की साफ-साफ जानकारी मिले। परिवार की चिंता थमने का नाम नहीं ले रही है। वे न्याय की उम्मीद कर रहे हैं और चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाएं।

यह मामला न केवल सड़क सुरक्षा के पहलू को उभारता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे कानूनी प्रणाली में सही तरीके से कार्यवाही की जानी चाहिए। सभी की नजरें अब इस मामले के न्यायोचित समाधान पर हैं।

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