सुकांत मजूमदार ने मंच पर अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभाकर सबको किया प्रेरित
सुकांत मजूमदार ने मंच पर अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभाकर सबको किया प्रेरित
NewsPoint•
नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का मंच पर अभिनय करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं के तहत, ऐसे कई राजनेता रहे हैं जिन्होंने अभिनय किया, लेकिन अपने राजनीतिक करियर के बीच अभिनय करने वाले नेताओं की संख्या कम है। सुकांत मजूमदार ने हाल ही में "केशरी हत्या" नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभाया। यह नाटक भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन पर आधारित है। उन्होंने नाटक में सूत्रधार की भूमिका भी निभाई।
सुकांत ने मीडिया को बताया कि उन्हें यह रोल ऑफर किया गया था। उन्होंने कहा, "हर बंगाली के अंदर अभिनय करने की एक दबी हुई इच्छा होती है, इसलिए मैंने इसे स्वीकार कर लिया।" बंगाल में सुकांत पहले ऐसे केंद्रीय मंत्री नहीं हैं जिन्होंने अभिनय किया है। इससे पहले अजीत पांजा ने 'नटी बिनोदिनी' के मंचन में श्री रामकृष्ण परमहंस का किरदार निभाया था। वरिष्ठ पत्रकार सौम्य बंदोपाध्याय ने भी इस विषय पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा, "अजीतदा और सुकांतबाबू के अलावा, मुझे पश्चिम बंगाल का कोई और केंद्रीय मंत्री याद नहीं आता जिसने किसी नाटक में अभिनय किया हो। हालांकि, सुब्रत मुखर्जी और ब्रत्या बसु ने मंच और सिनेमा, दोनों में अभिनय किया है।" सुब्रत मुखर्जी एक अनुभवी नेता थे जिन्होंने कांग्रेस पार्टी और बाद में तृणमूल कांग्रेस में काम किया। वह कोलकाता के मेयर भी रहे।
ब्रत्या बसु, जो 57 वर्ष के हैं, ममता बनर्जी के नेतृत्व में मंत्री रह चुके हैं, लेकिन उन्हें भी केंद्रीय मंत्री का अनुभव नहीं है। बंदोपाध्याय के साथ सहमति जताते हुए, पत्रकार गौतम होर ने कहा कि थिएटर का जुनून ही लोगों को शौकिया अभिनय की ओर खींचता है। उन्होंने कहा, "थिएटर से प्यार करने वाला कोई भी व्यक्ति मंच पर अभिनय कर सकता है, लेकिन एक मंत्री के रूप में ऐसा करना वाकई खास है। इसके लिए काफी समय चाहिए होता है, खासकर रिहर्सल के लिए।"
सुकांत ने कहा कि उन्होंने अपने आधिकारिक काम के बीच समय निकाला और जब भी उन्हें मौका मिलता, वे रिहर्सल में शामिल होते थे। यह दिखाता है कि वह अपने कार्यों के प्रति कितने समर्पित हैं।
राजनीति और अभिनय का यह मेल एक प्रेरणादायक कहानी है। सुकांत मजूमदार का अभिनय करना न केवल उनकी कलात्मक रुचि को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक नेता अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ अपने शौक को भी पूरा कर सकता है। यह बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का एक हिस्सा है, जहां राजनीति और कला का गहरा संबंध रहा है।
संबंधित पत्रकारों का मानना है कि ऐसे उदाहरण बंगाल में कदाचार या भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सार्थक पहल साबित हो सकते हैं। सुकांत का नाटक में अभिनय करना एक नई दिशा का संकेत है, जिसमें नेता अपनी कलात्मकता भी प्रदर्शित कर सकते हैं।
इस प्रकार, सुकांत मजूमदार का मंच पर अभिनय करना न केवल उनकी व्यक्तिगत रुचि को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे नेता अपने काम के साथ-साथ अपने शौक को महत्व दे सकते हैं। यह राजनीति के लिए एक नई मिसाल है।