महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को रायपुर कोर्ट में पेश करने की तैयारी, सीबीआई लाएगी
महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को रायपुर कोर्ट में पेश करने की तैयारी, सीबीआई लाएगी
NewsPoint•
महादेव ऐप अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को रायपुर कोर्ट में पेश किया जाएगा। सीबीआई उसे 3 नवंबर को ओमान से भारत लाकर रायपुर कोर्ट में पेश करने की योजना बना रही है। सौरभ चंद्राकर दो सीबीआई मामलों में वांछित है। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी उसकी जांच कर रहा है। चंद्राकर के खिलाफ पहले से चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसका मेडिकल परीक्षण होगा। फिर उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को उसके लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी है। इससे पहले, ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। सीबीआई और ईडी ने उसे भारत लाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। इन एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर इस मामले में पूरी तैयारी की थी। चंद्राकर को साथ लेकर आने वाली सीबीआई की विशेष टीम ने ओमान में अच्छा सहयोग प्राप्त किया। सीबीआई ने ओमान सल्तनत की सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार व्यक्त किया है।सौरभ चंद्राकर पर आरोप है कि वह महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट का प्रमोटर है। यह सिंडिकेट भारत के बाहर से संचालित होता था। यह क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम और अन्य खेलों पर अवैध सट्टेबाजी का काम करता था। चंद्राकर के खिलाफ मामले में कई बातें सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि इस सिंडिकेट की कमाई को कई फर्जी बैंक खातों के माध्यम से भेजा जाता था। इसके तहत लेनदेन को कई चरणों में किया जाता था और हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जाता था।
इस मामले में सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा राशि के रूप में पैसा दिया जाता था, जिससे बिना रुकावट के यह सिंडिकेट काम करता था। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में चंद्राकर प्रमुख आरोपियों में से एक है। ईडी ने सिंडिकेट से जुड़ी कई संपत्तियों को भी जब्त किया है।
सीबीआई ने छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर महादेव ऑनलाइन बुक मामलों की जांच शुरू की थी। सरकार ने इससे जुड़े 13 एफआईआर सीबीआई को भेजी थीं, जिनमें से दो मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। ईडी मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है और चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दर्ज कर चुका है।
जब सौरभ चंद्राकर को ओमान से वापस लाया गया, तब उसे रेड कॉर्नर नोटिस पर हिरासत में लिया गया था। यह नोटिस इंटरपोल से जारी किया गया था। सीबीआई और ईडी की टीम ने ओमान सरकार के साथ निकट संबंध बनाकर उसे प्रत्यर्पित कराने का प्रयास किया। उनके सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन आसानी से मामले को आगे बढ़ाया गया।
महादेव ऐप के मामले की जांच से यह भी साफ होता है कि भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार कितना बढ़ गया है। इससे जुड़ी हुई अपराध गतिविधियों की जड़ें काफी गहरी हैं। यह देश के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है। जांच एजेंसियों का लगातार प्रयास है कि इस तरह के नेटवर्क को खत्म किया जाए और सभी दोषियों को सजा दिलाई जाए।
इस मामले ने यह भी दिखाया है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में कड़ी मेहनत और योजना की आवश्यकता होती है। जिस तरह से सीबीआई और ईडी ने मिलकर काम किया है, वह सराहनीय है। यह सब देखकर ऐसा लगता है कि अब अवैध सट्टेबाजी के कारोबार में शामिल लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।