केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' में भूटान के राजा को समर्पित किया 108 पवित्र स्तूप
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' में भूटान के राजा को समर्पित किया 108 पवित्र स्तूप
NewsPoint•
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 2 नवंबर को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक पवित्र स्तूप का समर्पण करना बहुत महत्वपूर्ण है। ये स्तूप 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' में स्थापित किए गए हैं। रिजिजू ने रविवार को 108 स्तूपों के निर्माण समर्पण समारोह में भाग लिया। यह समारोह राजा के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इसे भारत और भूटान के बीच के गहरे रिश्तों का प्रतीक माना गया।
सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, "किसी व्यक्ति को एक पवित्र स्तूप समर्पित करना सामान्य बात नहीं है। यह अत्यंत पुण्यदायक, शुभ और आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।" उन्होंने बौद्ध धर्म में स्तूप की अहमियत को भी बताया। उन्हें गर्व है कि वे इस पवित्र आयोजन का हिस्सा बने।यह समारोह 'ल्हाबाब दुचेन' जैसे शुभ अवसर पर हुआ। इसमें 108 स्तूपों का निर्माण और अभिषेक किया गया। इस अवसर पर पारंपरिक दुंगचेन वाद्य यंत्र भी बजाए गए। मंत्रालय ने बताया कि ये 108 स्तूप की परियोजना खुद राजा ने बनाई थी और उन्होंने इसके कार्यान्वयन में मार्गदर्शन किया।
इन 108 स्तूपों के निर्माण में हजारों स्वयंसेवकों ने एक साथ काम किया। हर स्तूप की ऊंचाई 15 मीटर है और इन्हें 108 मीटर की दूरी पर स्थापित किया गया है। ये स्तूप असम सीमा के पास 'आई (माउ) नदी' के किनारे 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' में बनाए गए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' को वज्रयान बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है। यह भूटान की संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को भी दर्शाती है।
31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक किरेन रिजिजू की भूटान यात्रा हुई। इस दौरान उन्होंने राजा वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग टोबगे से भी बातचीत की। दोनों पक्षों ने भारत और भूटान के बीच की दोस्ती और विकास सहयोग की सराहना की।
रिजिजू ने इस दौरान कहा कि 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' परियोजना के लिए भारत का समर्थन बना रहेगा। उन्होंने बताया कि यह लाभदायक परियोजना भूटान के साथ-साथ भारत के पड़ोसी क्षेत्रों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस पूरे समारोह ने भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को और मजबूत किया है। रिजिजू ने इस बात पर जोर दिया कि हर स्तूप का निर्माण एक पुण्य कार्य है और इसका महत्व सभी के लिए बहुत बड़ा है।
राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का आभार व्यक्त करने के साथ-साथ रिजिजू ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भूटानियों की मेहनत की भी प्रशंसा की। यह सब कुछ भारत और भूटान के बीच का अटूट बंधन दर्शाता है।