सतर्कता जांच ब्यूरो ने बेगुसराय में एएसआई चंदन झा को 29,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा
सतर्कता जांच ब्यूरो ने बेगुसराय में एएसआई चंदन झा को 29,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा
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पटना, 2 नवंबर (आईएएनएस)। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में सतर्कता जांच ब्यूरो (आईएसआई) ने सोमवार को बेगुसराय जिले के साहिबपुर कमल पुलिस स्टेशन में तैनात एक सहायक सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) को 29,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान चंदन झा के रूप में हुई है। एसआई ने एक आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता का नाम हटाने के लिए पैसे की मांग की थी। शिकायत मिलने पर पटना की सतर्कता टीम ने एक गुप्त ऑपरेशन किया और उसे पकड़ लिया।
यह कार्रवाई जिले के निवासी अमित कुमार की शिकायत पर हुई। अमित ने बताया कि एएसआई चंदन झा ने उनसे पैसों की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सतर्कता विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। एएसआई चंदन भा ने पहले 30,000 रुपए मांगे थे, लेकिन बाद में बातचीत करके यह राशि 29,000 रुपए पर तय की गई। जांच के दौरान, एएसआई को शिकायतकर्ता से यह राशि लेते हुए पकड़ लिया गया। डीएसपी गौतम शरण ने बताया कि एएसआई चंदन झा ने एक चार पहिया वाहन को लेकर पैसा मांगा था। उन्होंने बताया कि इस वाहन का पहले ट्रैफिक जाम होने पर जब्त किया गया था। शराब तस्करी से जुड़े एक मामले में यही वाहन बाद में विवाद का विषय बना। चंदन झा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने वाहन बेच दिया था, फिर भी इस मामले से अमित का नाम हटाने के लिए रिश्वत की मांग की।
गिरफ्तारी के बाद, सतर्कता दल आरोपी को कानून की औपचारिकता पूरी करने के लिए बेगुसराय सर्किट हाउस ले गया। उसके बाद एएसआई को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया गया। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के मुद्दे को एक बार फिर से सामने लाता है।
सतर्कता विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि वे रिश्वत मांगने या देने वाले लोक सेवकों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे। इस मामले की आगे की जांच भी चल रही है। इस तरह की कार्रवाई ऐसे वक्त में हुई है जब पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए गंभीर है।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने बेगुसराय पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है। सभी यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या आगे इस तरह की और कार्रवाइयाँ की जाएंगी। यह मामला एक बार फिर से साबित करता है कि भ्रष्टाचार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, सत्य की हमेशा जीत होती है।