भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 80,000 पर पहुंचा विदेशी निवेशकों की खरीदारी से

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भारतीय शेयर बाजार ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट के बीच शानदार तेजी दिखाई है। शुक्रवार, 6 नवंबर को सेंसेक्स ने करीब 900 अंकों की बढ़त के साथ 80,000 का आंकड़ा पार कर लिया। निफ्टी भी लगभग 200 अंकों की उछाल के साथ 24,750 के आसपास कारोबार कर रहा है। यह तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए खास है क्योंकि सेंसेक्स लगभग 8 महीने बाद 80,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।

गुरुवार को भी बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला, जहां सेंसेक्स 2,009 अंक की उछाल के साथ 79,310 पर बंद हुआ। वर्ष 2023 में सेंसेक्स की इससे बड़ी एकदिनी बढ़त 8 अप्रैल को हुई थी, जब इसमें 2,946 अंकों की वृद्धि आई थी। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में तेजी बनी हुई है, जो पिछले सात कारोबारी सत्रों से जारी है।
इसके पीछे मुख्य कारणों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती शामिल है।

भारतीय शेयर बाजार में इस तेजी के दो बड़े कारण हैं। पहला, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की ओर से लगातार खरीदारी। दूसरे, देश की बड़ी कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे।

पिछले कुछ कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 32,210 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसने बाजार को एक मजबूत सहारा दिया है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बिकवाली की है, लेकिन विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सकारात्मक भावना बनी हुई है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 7 दिनों में DII में 10,445 करोड़ रुपये की बिक्री हुई है, जबकि FII/FPI की ओर से 14,975 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई है।

इसके अलावा, बड़ी कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने भी बाजार की स्थिति को बेहतर किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टीसीएस जैसी कंपनियों के शेयरों में तेजी ने सेंसेक्स को सहारा दिया है। सेंसेक्स में शामिल 30 बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन इंडेक्स को प्रभावित करता है। जब इन कंपनियों के शेयरों में तेजी आती है, तो सेंसेक्स भी आगे बढ़ता है।

हालांकि, जहां भारतीय बाजार में तेजी है, वहीं एशिया के कई प्रमुख बाजारों में गिरावट हो रही है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई लगभग 5 से 6% तक गिर गए हैं। हॉन्गकॉन्ग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी गिरावट का सामना करना पड़ा है।

इसके अलावा, अमेरिकी शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली की गई। डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि ग्लोबल बाजारों में दबाव के बावजूद भारतीय बाजार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला 28 अक्टूबर से चल रहा है। इस वक्त सेंसेक्स 73,246 के स्तर से बढ़कर 80,000 के पार पहुंच गया है। इसका मतलब है कि पिछले 7 कारोबारी दिनों में सेंसेक्स में 8% से अधिक की वृद्धि हुई है।

निवेशकों में शेयरों की खरीदारी की दिलचस्पी बढ़ी है। विशेष रूप से बड़ी और मजबूत कंपनियों के शेयरों ने सेंसेक्स को ऊंचाई पर पहुंचाने में मदद की है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार का कहना है, "कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में संभावित बदलाव की उम्मीद ने विदेशी निवेशकों का नजरिया बेहतर किया है।" उनका यह भी मानना है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार में लौट रहा है।

हालांकि, LTCG टैक्स में बदलाव की संभावना को अभी उम्मीद के तौर पर ही देखना चाहिए। जब तक सरकार कोई आधिकारिक घोषणा नहीं करती, तब तक इसे निश्चितता के साथ नहीं देखा जा सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी से लार्जकैप यानी बड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती आई है। आने वाले समय में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के बड़े शेयरों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। डॉ. विजयकुमार के अनुसार, "लार्जकैप शेयरों में अभी शॉर्ट कवरिंग की गुंजाइश बनी हुई है। ऐसे में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के अगुवाई में बाजार में आगे भी रिकवरी देखने को मिल सकती है।"

हालांकि, उन्होंने निवेशकों को मुनाफा निकालने के जोखिम के बारे में भी चेतावनी दी है। जब बाजार तेजी में होता है, तो घरेलू निवेशक ऊंचे स्तरों पर शेयर बेचकर मुनाफा निकाल सकते हैं। इससे बाजार में कुछ समय के लिए दबाव आ सकता है।

सेंसेक्स का 80,000 के पार पहुंचना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। विदेशी निवेशकों का समर्थन और बेहतर तिमाही नतीजे बाजार को मजबूती दे रहे हैं, लेकिन ग्लोबल बाजारों की गिरावट और ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूली का जोखिम भी तेज हो गया है।

इसलिए, निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे जल्दीबाजी में निवेश न करें। किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की मूलभूत जानकारी, मूल्यांकन और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता पर विचार करना चाहिए। शेयर बाजार में हमेशा तेजी और गिरावट दोनों का खतरा बना रहता है।

इसलिए, समझदारी से निर्णय लेना ही उचित है।

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